धनबाद: भुगतान रुके होने और रॉयल्टी चालान से जुड़े विवाद को लेकर धनबाद जिला संवेदक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। संघ की ओर से दायर याचिका में वर्तमान व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूर्व में हुए इकरारनामे के अनुसार भुगतान की मांग की गई है।
अध्यक्ष आकाश रवानी ने उठाए सवाल
याचिकाकर्ता एवं धनबाद जिला संवेदक संघ के अध्यक्ष आकाश रवानी ने कहा कि कार्यपालक अभियंता राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में संवेदकों के साथ इकरारनामा करते हैं। उनका कहना है कि इकरारनामे में रॉयल्टी भुगतान की जो व्यवस्था दर्ज है, उसी के आधार पर सभी संवेदकों ने निर्माण स्थलों पर सामग्री उपलब्ध कराई थी।
उन्होंने कहा कि अब पुराने कार्यों के लिए रॉयल्टी चालान उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू कर भुगतान रोकना संवेदकों के साथ अन्याय है।
वरिष्ठ संवेदक ने भी जताई आपत्ति
वरिष्ठ संवेदक राजेश सिंह ने कहा कि यदि ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव स्वयं यह स्वीकार कर चुके हैं कि कई मामलों में चालान उपलब्ध नहीं हैं, तो ऐसे में इस प्रकार का नियम लागू करना विकास कार्यों को बाधित करने जैसा है। उन्होंने सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की।
सामूहिक याचिका में कई संवेदक शामिल
संवेदक संघ की ओर से दायर सामूहिक याचिका में पप्पू चौरसिया, राजेश सिंह, रशाद खान, अतहर नवाज खान, राजीव रंजन घोष, जयदीप कुमार, समीर कुमार मंडल, मोहम्मद नौसाद अली, काशी नाथ प्रसाद, महबूब आलम, सच्चिदानंद सिन्हा, सुरेंद्र कुमार झा, प्रमोद कुमार साव, शंकर सिंह, न्यूरेमन अंसारी, सुजीत कुमार, मनीष कुमार साव, मोहन चंद्र कुम्हार, मनोज महथा, अरविंद सिंह, राकेश तिवारी, शंकर भगत, अजय कुमार सहित अन्य संवेदक शामिल हैं।
क्या है विवाद?
संवेदक संघ का कहना है कि रॉयल्टी चालान से संबंधित नई प्रक्रिया के कारण कई निर्माण कार्यों का भुगतान लंबित है। संघ का दावा है कि कार्य अनुबंध (इकरारनामा) में निर्धारित शर्तों के अनुरूप ही भुगतान किया जाना चाहिए।
