धनबाद: वासेपुर के फहीम खान की रिहाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को फहीम खान को रिहा करने का निर्देश दिया गया था। इसके साथ ही सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज हो गई।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रखा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में शामिल न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति महादेवन ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को सही माना। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने रिहाई का दिया था आदेश
झारखंड हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को फहीम खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर उन्हें रिहा करने का निर्देश दिया था। आदेश के पालन में देरी होने पर फहीम खान की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर की गई थी।
17 वर्षों से जेल में हैं फहीम खान
फहीम खान वर्ष 2009 से आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं और वर्तमान में जमशेदपुर की घाघीडीह केंद्रीय जेल में बंद हैं। यह मामला 10 मई 1989 को वासेपुर में सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या से जुड़ा है।
सत्र न्यायालय ने वर्ष 1991 में फहीम खान सहित अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद तत्कालीन बिहार सरकार ने फैसले को चुनौती दी। आगे चलकर हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 में फहीम खान को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसे वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
रिहाई के आदेश का आधार क्या था?
हाईकोर्ट ने अपने 2025 के फैसले में कहा था कि फहीम खान के मामले में 1984 की रिमिशन (सजा में छूट) नीति लागू होगी, क्योंकि मूल सत्र न्यायालय का फैसला 15 जून 1991 को आया था। अदालत ने माना कि 2007 की संशोधित नीति इस मामले पर लागू नहीं होती। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फहीम खान की रिहाई का आदेश दिया था।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार की याचिका खारिज किए जाने के बाद फहीम खान की रिहाई का रास्ता साफ होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि वह उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी।

