झरिया/धनबाद: झरिया विधानसभा क्षेत्र की प्रमुख झरिया-बलियापुर मुख्य सड़क निर्माण के महज एक वर्ष के भीतर ही मोहरीबांध के समीप गंभीर भू-धंसान की चपेट में आ गई है। लगभग 44 करोड़ रुपये की लागत से बनी 11 किलोमीटर लंबी इस सड़क के कई हिस्सों में जमीन धंसने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। रविवार को झरिया विधायक रागिनी सिंह ने रांची से पहुंचे पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों और BCCL अधिकारियों के साथ प्रभावित स्थल का निरीक्षण किया।
भूमिगत आग और भू-धंसान को बताया वजह
निरीक्षण के दौरान पथ निर्माण विभाग, रांची के अधिकारी अरविंद कुमार, धनबाद पथ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता मिथलेश कुमार तथा BCCL के महाप्रबंधक ए.के. सिन्हा मौजूद रहे।
निरीक्षण के बाद अरविंद कुमार ने कहा कि सड़क का निर्माण सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया था और कार्य शुरू करने से पहले BCCL से विधिवत अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी प्राप्त किया गया था। उनके अनुसार सड़क की क्षति निर्माण गुणवत्ता के कारण नहीं, बल्कि क्षेत्र में सक्रिय भूमिगत आग और लगातार हो रहे भू-धंसान (सबसीडेंस) की वजह से हुई है।
उन्होंने बताया कि वैकल्पिक मार्ग (डायवर्शन) के निर्माण का प्रस्ताव जनवरी में ही तैयार कर BCCL को भेजा जा चुका है। फंड उपलब्ध होते ही डायवर्शन का निर्माण शुरू किया जाएगा ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
कार्यपालक अभियंता ने गुणवत्ता पर उठे सवालों को किया खारिज
धनबाद पथ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता मिथलेश कुमार ने कहा कि सड़क निर्माण में किसी प्रकार की तकनीकी कमी नहीं रही। उनके अनुसार भूमिगत आग के कारण नीचे की मिट्टी खोखली हो गई, जिससे सड़क बैठ गई। उन्होंने कहा कि भूमिगत आग की वास्तविक स्थिति की जानकारी BCCL के पास होती है और विभाग ने उसी आधार पर NOC प्राप्त कर निर्माण कराया था।
विधायक रागिनी सिंह ने उठाए गंभीर सवाल
निरीक्षण के बाद झरिया विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि यह केवल सड़क धंसने का मामला नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क का इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है। उनके अनुसार प्रतिदिन हजारों लोग इस मार्ग से गुजरते हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

रागिनी सिंह ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को कई बार जिला प्रशासन, विधानसभा और संबंधित विभागों के समक्ष उठाया है। उन्होंने केंदुआ मुख्य मार्ग की तरह इस सड़क को भी तत्काल बंद कर सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग शुरू करने की मांग की।
साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि यदि क्षेत्र पहले से भूमिगत आग से प्रभावित था तो सड़क निर्माण के लिए NOC कैसे जारी की गई। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
डेढ़ साल से बंद है वैकल्पिक मार्ग
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से वैकल्पिक मार्ग बंद होने के कारण लोगों को मजबूरी में इसी खतरनाक सड़क से गुजरना पड़ रहा है। पिछले वर्ष भी इस क्षेत्र का निरीक्षण किया गया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका।

अब लोगों की निगाहें समाधान पर
झरिया-बलियापुर सड़क कोयलांचल क्षेत्र की महत्वपूर्ण संपर्क सड़कों में शामिल है। सड़क धंसने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रभावित क्षेत्र में निर्माण की अनुमति किन आधारों पर दी गई और सुरक्षा के लिए समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। फिलहाल पथ निर्माण विभाग और BCCL संयुक्त रूप से स्थिति का आकलन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों को अब वैकल्पिक मार्ग के शीघ्र निर्माण, मुख्य सड़क की मरम्मत और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार है।

