लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को मणिपुर में हुई ताजा हिंसा को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राज्य में नफरत और हिंसा के कारण कम से कम 20 घर जल गए हैं।
राहुल गांधी ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए एक समाचार रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि मणिपुर की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की।
गांधी ने कहा कि दो सरकारों और राष्ट्रपति शासन के बावजूद राज्य में संघर्ष गहराता जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘मणिपुर वर्षों से जल रहा है, और आज फिर नफरत और हिंसा की आग में 20 घर राख हो गए हैं।’ हजारों लोगों ने अपनी जान गंवाई है और अनगिनत परिवार बिखर गए हैं। मणिपुर जो असहनीय पीड़ा झेल रहा है, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है।
राहुल गांधी ने आगे कहा कि मोदी सरकार की विभाजनकारी नीति लोगों को धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और पहचान के नाम पर बांटती है। उन्होंने टिप्पणी की कि यह मोदी सरकार की विभाजनकारी विचारधारा का परिणाम है। आज केवल मणिपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश ने प्रधानमंत्री से सहानुभूति के दो शब्दों की भी उम्मीद छोड़ दी है। मणिपुर बेहतर का हकदार है, और इसके लिए भारत को एकजुट करना ही एकमात्र रास्ता है।
वहीं आपको बता दें कि इससे पहले 23 जून को हजारों महिला विक्रेताओं ने धरना प्रदर्शन किया था। उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों द्वारा गांव के स्वयंसेवकों की हालिया गिरफ्तारी पर अपना गुस्सा व्यक्त किया। मणिपुरी समाज में एक शक्तिशाली और प्रभावशाली समूह के रूप में, प्रदर्शनकारियों ने तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI), सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) और मणिपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए स्वयंसेवकों की बिना शर्त रिहाई की मांग की।

