भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में नया मोड़ आ गया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में उनकी मां आशा देवी के बयान पर शाहपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। दर्ज एफआईआर में जगदीशपुर के डीएसपी, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपित बनाया गया है।
वहीं भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एनकाउंटर को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह किसी भी प्रकार के एनकाउंटर का समर्थन नहीं करते हैं और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेकर किसी व्यक्ति को गोली मारने का अधिकार नहीं है। उन्होनें ये भी कहा कि किसी भी मामले में कानून का पालन होना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी घटना में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

साथही मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी(Jitan Ram Manjhi) ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X पर पोस्ट करते हुए एनकाउंटर को लेकर उठ रहे सवालों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिप्पणी की। मांझी ने अपने पोस्ट में कहा कि कुछ लोग भरत तिवारी एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन यह भी पूछा जाना चाहिए कि भरत तिवारी के पास अवैध पिस्तौल कहां से आई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किन लोगों के संरक्षण में इस मामले पर राजनीति की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश संविधान और कानून के अनुसार चलेगा, न कि अवैध हथियारों के बल पर। उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि भरत तिवारी कोई क्रांतिकारी नहीं थे और पूर्व में भी उनके खिलाफ आपराधिक मामलों में कार्रवाई हो चुकी थी।
पोस्ट में उन्होंने एक शेर भी साझा किया—
“लश्कर भी तुम्हारा है, सरदार तुम्हारा है,
तुम झूठ को सच लिख दो, अखबार तुम्हारा है…”
आपको बता दें कि भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार में राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। विपक्षी दल जहां मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार ने पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एनकाउंटर पुलिस नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत हुआ था या नहीं। इसका जवाब न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल सभी की निगाहें जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं, जो इस मामले की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाएंगे।
