पटना(PATNA) : सम्राट चौधरी ने बुधवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेते ही सम्राट चौधरी भारतीय जनता पार्टी के ऐसे दसवें नेता बन गए हैं जो दूसरी पार्टी से आए और मुख्यमंत्री बने। सम्राट से पहले असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, अरुणाचल प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री पेमा खांडू और पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग, मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानांद सोनोवाल, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, मणिपुर के वर्तमान मुख्यमंत्री युवनाम खेमचंद और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसराज बोम्मई ऐसे नेता नेता रहे हैं जो दूसरी पार्टी से बीजेपी में आए और सीएम की कुर्सी तक पहुंचे।
इनमें से पांच नेता कांग्रेसी रहे है
हिमंता बिस्वा सरमा ने लगभग 20 साल कांग्रेस में बिताए और तरुण गोगोई सरकार में मंत्री रहे। 2015 में वह भाजपा में शामिल हुए। पेमा खांडू ने अपना राजनीतिक करियर कांग्रेस से शुरू किया था। 2016 में पहले वह ‘पीपुल्स पार्टी आफ अरुणाचल’ में गए और फिर दिसंबर 2016 में ही पेमा खांडू ने पीपीए के 43 में से 33 विधायकों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया और सदन में अपना बहुमत साबित कर दिया। जिसके बाद पेमा खांडू अरुणाचल प्रदेश में भाजपा के मुख्यमंत्री बन गए।
अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर भारत का पहला राज्य बना जहां भाजपा की सरकार बनी
गेगोंग अपांग लंबे समय तक अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री रहे। साल 2014 में गेगोंग अपने समर्थक विधायकों के साथ औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। अपांग के पार्टी में शामिल होने से 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा विधायकों की कुल संख्या 42 हो गई और इस तरह अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर भारत का पहला राज्य बन गया जहां भाजपा की सरकार बनी। अपांग इस सरकार में भाजपा के मुख्यमंत्री रहे।
अर्जुन मुंडा ने 1980 के दशक की शुरुआत में राजनीतिक जीवन में कदम रखा। 1995 में वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के टिकट पर खरसावां क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए चुने गए। 2000 के विधानसभा चुनाव में वे भाजपा के टिकट पर खरसावां से फिर से बिहार विधानसभा के लिए चुने गए। 15 नवंबर 2000 को झारखंड एक नया राज्य बना तब अर्जुन मुंडा बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व वाली पहली राजग गठबंधन सरकार में आदिवासी कल्याण मंत्री बने। 2003 में सिर्फ 35 वर्ष की उम्र में अर्जुन मुंडा पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने।
बीरेन सिंह ने भाजपा के टिकट पर हिंगांग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता
एन बीरेन सिंह ने 2002 में राजनीति में कदम रखा और डेमोक्रेटिक रेवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी (डीआरपीपी) के उम्मीदवार के तौर पर हिंगांग निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार मणिपुर विधानसभा के लिए चुने गए। 2003 में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और मई 2003 में राज्य सरकार में मंत्री बने। 2007 और 2012 में भी उन्होंने लगातार तीसरी बार अपनी विधानसभा सीट बरकरार रखी। बीरेन 17 अक्तूबर, 2016 को औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हो गए। 2017 के मणिपुर विधानसभा चुनाव में बीरेन सिंह ने भाजपा के टिकट पर हिंगांग विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। मार्च 2017 में उन्हें भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया और वह मुख्यमंत्री बने।
माणिक साहा ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और वर्ष 2016 से पहले तक वे कांग्रेस पार्टी के ही सदस्य थे। साल 2016 में माणिक साहा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। 2020 में उन्हें त्रिपुरा प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिस पद पर उन्होंने 2022 तक कार्य किया। अप्रैल 2022 में पार्टी ने उन्हें त्रिपुरा से राज्यसभा सांसद भी बनाया था। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव से महज एक साल पहले, 14 मई 2022 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 15 मई 2022 को माणिक साहा ने त्रिपुरा के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
फरवरी 2008 में बोम्मई ने भाजपा का दामन थामा था
बसवराज बोम्मई कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एसआर बोम्मई के बेटे हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1992 में जनता दल के सदस्य के रूप में की थी। फरवरी 2008 में बोम्मई ने भाजपा का दामन थाम लिया। उसी वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में वे शिगगांव निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए। 26 जुलाई, 2021 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और 28 जुलाई को बसवराज बोम्मई ने कर्नाटक के 23वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
युमनाम खेमचंद सिंह ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के साथ डेमोक्रेटिक रेवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी से की थी। 2012 में मणिपुर में हुए चुनाव में खेमचंद सिंह ने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें जीत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 2013 में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। 2017 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर सिंगजामेई निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता और पहली बार मणिपुर विधानसभा पहुंचे। 2017 में जब राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार (बीरेन सिंह के नेतृत्व में) बनी तो खेमचंद को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 2022 में फिर से चुनाव जीतने पर वे दूसरी बीरेन सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।
बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद सीएम बने युमनाम खेमचंद सिंह
मणिपुर में चले लंबे जातीय संघर्ष की वजह से बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा और 13 फरवरी 2025 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। तीन फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में उन्हें मणिपुर भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। इसके अगले ही दिन, राज्य से राष्ट्रपति शासन हटने पर 4 फरवरी 2026 को युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया और शुरुआती दिनों में समता पार्टी से भी जुड़े रहे। मई 1999 में वे राबड़ी देवी की राजद सरकार में कृषि मंत्री बने। बाद में वे राजद से कई बार चुनाव लड़े। 2014 के करीब उन्होंने राजद को छोड़ दिया और जेडीयू का हिस्सा बन गए। जब जीतनराम मांझी ने नीतीश से बगावत की और नई पार्टी बनाई तो सम्राट चौधरी ने जेडीयू में रहने के बावजूद मांझी की नई पार्टी हम का समर्थन किया। यहां तक कि जेडीयू ने उनकी विधान परिषद सदस्यता तक रद्द कर दी।
जेडीयू और हम के बीच राजनीति में उलझने के कुछ समय बाद ही, 2017 में वे भाजपा में शामिल हो गए। 2018 में पार्टी की बिहार इकाई के प्रदेश उपाध्यक्ष बने। 2020 में वे बिहार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) चुने गए और 2021 में राजग सरकार में पंचायती राज मंत्री बने। 2022 में उन्हें बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चुना गया। मार्च 2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिस पद पर वे 26 जुलाई 2024 तक रहे। जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार ने राजग में वापसी की तो सम्राट चौधरी को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया और उन्हें वित्त और स्वास्थ्य जैसे कई महत्त्वपूर्ण विभाग सौंपे गए।
भाजपा के अब तक देश में 57 मुख्यमंत्री रहे हैं
देश के विभिन्न राज्यों में भाजपा के अब तक 57 मुख्यमंत्री रहे हैं। इनमें से करीब 40 ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जिनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की रही है। वहीं, 16 ऐसे हैं जिनका आरएसएस से कोई नाता नहीं रहा है।
सम्राट’ सरकार में हुआ विभागों का बंटवारा, गृह समेत 29 मंत्रालय सीएम के पास
बिहार में नई सरकार बनने के बाद विभागों का बंटवारा भी हो गया है। फिलहाल ज्यादातर विभाग मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के जिम्मे रखे गए हैं। मुख्यमंत्रीने अपने पास कुल 29 विभाग रखे हैं। इनमें गृह, सामान्य प्रशासन, नगर विकास, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, पथ निर्माण समेत कई अहम विभाग शामिल हैं।
NEWSANP के लिए ब्यूरो रिपोर्ट

