अमेरिका-ईरान शांति समझौते में एक बहुत बड़ा बदलाव हुआ है। ईरान का दावा है कि अमेरिका ने अंतिम सहमति में यह माना है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल सकता है। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक ईरान के टोल वसूल करने के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। चंद घंटे पहले तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और बिना टोल के जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही की वकालत करते दिखाई दिए थे। ट्रंप ने कई मौकों पर कहा है कि वह ईरान को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूल करने की अनुमति नहीं देंगे।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्स न्यूज’ ने एक सूत्र के हवाले से बताया है कि समझौते में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में समुद्री सेवाओं के प्रबंधन में ईरान और ओमान की भूमिका का जिक्र है, जिससे भविष्य में कमर्शियल शिपिंग से राजस्व वसूली का रास्ता साफ हो गया है। सूत्र ने कहा कि बातचीत के अंतिम चरणों में समझौते के टेक्स्ट में बदलाव किए गए ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरानी और ओमानी अधिकार का जिक्र मजबूत किया जा सके।
शांति समझौते के टेक्स्ट में किए गए बदलाव
सूत्र ने फार्स को बताया, “बातचीत के अंतिम क्षणों में, समझौते के टेक्स्ट में ऐसे बदलाव किए गए जो होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की संप्रभुता के मुद्दे पर निश्चित और स्पष्ट रूप से जोर देते हैं।” सूत्र ने कहा कि हालांकि समझौते के शुरुआती वर्शन में ऐसे प्रावधान थे जो ईरानी संप्रभुता और संबंधित व्यवस्थाओं को लागू करना सुनिश्चित करते, लेकिन अंतिम टेक्स्ट में अब यह कहा गया है कि “होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सेवाओं के प्रशासन का भविष्य” ईरान और ओमान द्वारा तय किया जाएगा।
ईरान होर्मुज से टोल नहीं वसूलेगा
रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान “समुद्री सेवाओं” शब्द को शामिल किए जाने को वाशिंगटन की ओर से एक महत्वपूर्ण रियायत के तौर पर देखता है। सूत्र ने कहा, “‘समुद्री सेवाओं’ शब्द के इस्तेमाल की घोषणा का मतलब होगा कि अमेरिका द्वारा ईरान के लिए फीस की वसूली को पक्का करना।” रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान शुरुआती 60 दिनों की अवधि के लिए बिना किसी शुल्क के जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने देने पर सहमत हो गया है।
सूत्र ने कहा, “ईरान केवल 60 दिनों तक बिना शुल्क के जहाजों के गुजरने को स्वीकार करेगा। यानी, अमेरिका ने फीस लेने के सिद्धांत को स्वीकार कर लिया है और ईरान से केवल 60 दिनों की छूट हासिल की है।” रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की योजना 60 दिनों की अवधि के बाद समुद्री सहायता कार्यों से जुड़े एक ढांचे के माध्यम से कमर्शियल जहाजों से राजस्व वसूलना शुरू करने की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस व्यवस्था में ओमान का सहयोग एक अहम हिस्सा माना गया।

