शांति समझौते के बाद ईरान का बड़ा बयान, कहा- बातचीत का स्वागत, लेकिन आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकता

शांति समझौते के बाद ईरान का बड़ा बयान, कहा- बातचीत का स्वागत, लेकिन आंख मूंदकर भरोसा नहीं कर सकता

अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते पर मुंबई में ईरान के महावाणिज्यदूत सईद रजा मोसयेब मोतलाघ ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा से संवाद और कूटनीतिक समाधान का पक्षधर रहा है। यदि मौजूदा विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकलता है, तो यह दोनों देशों के लिए एक सकारात्मक और स्वागतयोग्य कदम होगा।

मोतलाघ ने कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने हमेशा वार्ता और शांतिपूर्ण संवाद का समर्थन किया है। ऐसे में यदि बातचीत के जरिए चुनौतियों को कम करने और समस्याओं का समाधान निकालने में सफलता मिलती है, तो ईरान इसका खुले दिल से स्वागत करेगा।

सईद रजा मोसयेब मोतलाघ ने कहा कि ईरान को पहले भी वैश्विक परमाणु क्लब के सदस्य देशों में से एक के रूप में माना जाता रहा है, लेकिन अमेरिका ने विभिन्न कारणों से बार-बार इस मान्यता में बाधाएं खड़ी कीं. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका हर बार नए मुद्दे उठाकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रोकता रहा. हालांकि उन्होंने कहा कि यदि अब इस सदस्यता की स्थिति अधिक स्पष्ट होती है, तो यह ईरान के लिए एक सकारात्मक विकास होगा.

इजरायल पर लगाए गंभीर आरोप
इजरायल को लेकर ईरानी महावाणिज्यदूत ने कहा कि इजरायल किसी भी प्रकार की बातचीत और समझौते का विरोध करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए हिंसा, युद्ध और संकट पैदा करने की नीति अपनाता है. उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में दुनिया ने यह व्यवहार खुलकर देखा है, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है. उनके अनुसार, इतिहास में भी सबरा और शतीला जैसे नरसंहार इसके उदाहरण रहे हैं. मोतलाघ  ने कहा कि वर्तमान में भी इजरायल बातचीत की प्रक्रिया को कमजोर कर उसे युद्ध की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहा है.

अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
ईरानी राजनयिक ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के बीच बेहद करीबी संबंध हैं. ऐसे में इजरायल के कदमों की जिम्मेदारी और उसके परिणामों की जवाबदेही भी अमेरिका पर आती है.

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय दायित्वों और प्रतिबद्धताओं के तहत इस जिम्मेदारी को स्वीकार किया है, इसलिए उसे इसके परिणामों का भी सामना करना चाहिए.

एक अन्य सवाल के जवाब में सईद रजा मोसयेब मोतलाघ ने कहा कि इजरायल की नीति हमेशा युद्ध और हिंसा को बढ़ावा देने की रही है. उन्होंने कहा कि इजरायल की हिंसक गतिविधियां कभी रुकी नहीं हैं. पिछले दो वर्षों में यह गतिविधियां खुले तौर पर दिखाई दीं, जबकि कई बार इन्हें पर्दे के पीछे भी अंजाम दिया गया. उनके अनुसार, इजरायल हर अवसर का इस्तेमाल बातचीत की प्रक्रिया को बाधित करने और उसे विफल बनाने के लिए करता है.

ईरानी महावाणिज्यदूत ने कहा कि ईरान अमेरिका और इजरायल के करीबी संबंधों को अच्छी तरह समझता है. इसके बावजूद अमेरिका ने कुछ प्रतिबद्धताएं की हैं और उसे उन पर कायम रहना चाहिए. हालांकि उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक अनुभवों, विशेष रूप से हाल के दो युद्धों को देखते हुए, ईरान अमेरिका की नीयत पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकता.

मोतलाघ ने कहा कि तमाम संदेहों के बावजूद ईरान ने वार्ता प्रक्रिया में पूरी सद्भावना के साथ हिस्सा लिया है. उन्होंने कहा कि ईरान ने ईमानदारी से बातचीत शुरू की और उसी भावना के साथ शुरुआती परिणामों तक पहुंचा है. अब उम्मीद है कि यही सद्भावना आगे भी बनी रहेगी और निर्धारित समयसीमा के भीतर बातचीत सफल होकर एक व्यापक और अंतिम समझौते में बदल जाएगी.

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *