राम जन्मभूमि चंदा मामले को लेकर निर्मोही अखाड़ा ने अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। अखाड़े ने मांग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए और ट्रस्ट में उसे ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि ट्रस्ट के सभी आय-व्यय और बही-खातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए, ताकि वित्तीय लेनदेन की पूरी जांच हो सके।
इसके अलावा, निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि राम मंदिर के गर्भगृह में वर्ष 1950 और 1982 में स्थापित प्रतिमाओं को दोबारा स्थापित करने का निर्देश दिया जाए। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (20 जुलाई, 2026) को राम जन्मभूमि चंदा मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई होने वाली है. उस दिन निर्मोही अखाड़ा की इस याचिका को भी रखा जा सकता है. बता दें कि निर्मोही अखाड़ा भी राम जन्मभूमि मामले में एक पक्ष था. उसने दावा किया था कि मूल मंदिर के विध्वंस से पहले वहां उसके साधु पूजा करते थे. इसलिए नए राम मंदिर में उसे ही सेवायत का अधिकार है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया था, लेकिन नए ट्रस्ट में निर्मोही के भी एक प्रतिनिधि को शामिल करने के लिए कहा था.
अखाड़े ने केंद्र सरकार पर लगाया आरोप
निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा कि साल 2019 में आए ऐतिहासिक फैसले को करीब सात साल बीत चुके हैं, लेकिन उस फैसले को अभी तक उसकी मूल भावना के मुताबिक लागू नहीं किया गया है. अखाड़े ने इसके लिए केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का पूरी तरीके से पालन नहीं किया, इसलिए आज हमारे सामने ऐसी परिस्थिति उभरकर सामने आई है.

