राजस्थान निकाय चुनाव में किस्मत आजमा रही असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। जयपुर बेंच ने पार्टी के उम्मीदवारों को आधिकारिक चुनाव चिन्ह ‘पतंग’ देने की मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया है।
इस फैसले के बाद फिलहाल AIMIM के उम्मीदवारों को निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ना पड़ेगा।
चुनाव आयोग ने क्यों नहीं दिया चुनाव चिन्ह?
पार्टी की ओर से बताया गया कि चुनाव आयोग ने AIMIM को ‘पतंग’ चुनाव चिन्ह देने से इनकार किया था। आयोग का कहना था कि पार्टी को राज्य स्तरीय मान्यता केवल तेलंगाना में मिली हुई है।
इसी फैसले के खिलाफ AIMIM ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सोमवार, 31 अगस्त को जस्टिस मनीष शर्मा की सिंगल बेंच ने मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने राजस्थान सरकार और निर्वाचन आयोग से दो हफ्ते के अंदर जवाब मांगा है। हालांकि, तब तक निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। ऐसे में मौजूदा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों को आधिकारिक चुनाव चिन्ह मिलने की उम्मीद कम हो गई है।
अब पंचायत चुनाव पर पार्टी की नजर
AIMIM के प्रवक्ता और अधिवक्ता आरिफ मोहम्मद के मुताबिक, पार्टी अगली सुनवाई में संशोधित याचिका दाखिल करेगी। इसमें आगामी पंचायत चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह देने की मांग की जाएगी।
RLP के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही AIMIM
राजस्थान निकाय चुनाव में AIMIM सांसद हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही है।
दोनों पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए लगातार प्रचार कर रही हैं। इसी कड़ी में 6 सितंबर को जयपुर के शास्त्री नगर इलाके में असदुद्दीन ओवैसी और हनुमान बेनीवाल की संयुक्त महारैली होने वाली है।
महारैली के जरिए शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
AIMIM और RLP इस महारैली के जरिए अपने गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। दोनों दलों का फोकस अपने-अपने समर्थक वोटरों को एकजुट करने पर है।
चुनाव चिन्ह को लेकर कानूनी झटके के बावजूद AIMIM ने अपना चुनाव प्रचार जारी रखा है। अब देखना होगा कि आगामी निकाय चुनाव में पार्टी बिना आधिकारिक चुनाव चिन्ह के कितना प्रभाव छोड़ पाती है।

