बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में हुए कथित पुलिस एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस घटना को लेकर सामने आए ताजा घटनाक्रम के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और जांच की दिशा में भी नए सवाल उठने लगे हैं. घटना के एक सप्ताह बाद, भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) सदर एसडीपीओ रंजीत कुमार सिंह और शाहपुर थाने की पुलिस टीम के साथ देर रात अचानक मृतक भरत तिवारी के घर पहुंचे। पुलिस अधीक्षक ने भरत के माता-पिता, भाई और भाभी से मिलकर करीब आधे घंटे तक बातचीत की।
भरत तिवारी के परिजनों का गुस्सा और दुख साफ दिखा
मुलाकात के दौरान भरत तिवारी के परिजनों का गुस्सा और दुख साफ देखने को मिला। मृतक की मां और अन्य सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि यह कोई वास्तविक एनकाउंटर नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या है। उन्होंने कहा कि भरत द्वारा आत्मसमर्पण करने के बावजूद निहत्थे हालत में पुलिसकर्मियों ने उसे गोली मार दी। परिजनों ने एसपी से साफ शब्दों में कहा कि वे इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हैं।
भरत की मां अपने बेटे के लिए न्याय की मांग को लेकर लगातार अड़ी हुई हैं
उन्होंने पुलिस अधीक्षक को बताया कि जब तक उनके बेटे की जान लेने वाले दोषी पुलिसकर्मियों को कड़ी से कड़ी सजा यानी फांसी नहीं मिल जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि कानून के रखवालों ने खुद कानून हाथ में लिया है, इसलिए उन पर हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। एसपी ने मां की बातों को बेहद गंभीरतापूर्वक सुना और उन्हें उचित कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया।
परिजनों को ढांढस बंधाते हुए भोजपुर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने पहले ही उच्च स्तरीय न्यायिक जांच का आदेश दे दिया है। उन्होंने परिवार से अपील की कि वे इस जांच प्रक्रिया में पुलिस और प्रशासन का सहयोग करें ताकि सच सामने आ सके। राहत की बात यह रही कि एसपी ने परिजनों को सूचित किया कि उनके ऊपर थाने में जो मुकदमा दर्ज किया गया था, उसे प्रशासन ने वापस ले लिया है।
क्या परिवार को मिली सुरक्षा का भरोसा
- भोजपुर के बिलौटी गांव की इस घटना के बाद से स्थानीय लोग लगातार पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं और इसे सरेआम की गई हत्या करार दे रहे हैं।
- भरत तिवारी के परिवार की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एसपी ने उनके घर पर विशेष सुरक्षा गार्ड मुहैया कराने की बात कही।
- देर रात हुए इस औचक दौरे में एसपी राज करीब आधे तक पीड़ित परिवार के घर रुके और उनके हर एक सवाल का जवाब दिया।
- परिजनों से मुलाकात खत्म करने और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा देने के बाद पुलिस अधीक्षक बिना किसी से बातचीत किए वहां से चुपचाप निकल गए।

