भारत रूस से कच्चा तेल अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय विकास के लिए खरीद रहा है, रूस की मदद करने के लिए नहीं। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर रूस से तेल खरीद रहा है। इसका उद्देश्य रूस को आर्थिक मदद देना नहीं है।
‘भारत अपने राष्ट्रीय विकास के लिए खरीद रहा तेल’
डेनिस अलीपोव ने कहा कि भारत रूस से तेल इसलिए खरीदता है, क्योंकि उसे अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है।
उन्होंने कहा, “भारत रूस का तेल रूस की मदद करने के लिए नहीं खरीदता। वह अपने लिए और अपने राष्ट्रीय विकास के लिए तेल खरीद रहा है।”
अलीपोव ने यह भी कहा कि रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने पश्चिमी देशों की ओर से लगाए जा रहे द्वितीयक प्रतिबंधों की भी आलोचना की।
2022 के बाद रूस से बढ़ी तेल खरीद
साल 2022 के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी बढ़ाई। इसकी एक बड़ी वजह रूस के तेल पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध और G7 तथा यूरोपीय संघ की ओर से लगाई गई प्राइस कैप रही।
यूरोपीय बाजार में रूसी तेल की मांग कम होने के बाद भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया। फिलहाल भारत रूस के कच्चे तेल का दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बताया जाता है।
रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका का टैरिफ दबाव
रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिका पहले भी भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगा चुका है। पिछले साल भारत से आने वाले सामान पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था।
हालांकि, इस साल फरवरी में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर अंतरिम ढांचे पर सहमति बनने के बाद यह शुल्क हटा दिया गया था। इसके बावजूद रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर अमेरिकी टैरिफ का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
अमेरिकी सीनेट में 100% टैरिफ का प्रस्ताव
अमेरिकी सीनेट में एक विधेयक पेश किया गया है, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच बड़े देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है।
अगर यह प्रस्ताव कानून बनता है, तो भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित विधेयक है।
‘भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जानता है’
डेनिस अलीपोव ने एएनआई से बातचीत में कहा कि भारत पहले भी यह दिखा चुका है कि वह अपने फैसलों पर मजबूती से कायम रह सकता है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जानता है।
उन्होंने कहा कि रूस भारत की जरूरत के मुताबिक उसे जितना तेल चाहिए, उतना उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।
पश्चिमी प्रतिबंधों को बताया दबाव की रणनीति
रूसी राजदूत ने पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और टैरिफ की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन देशों ने सहयोग के बजाय दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है।
अलीपोव के मुताबिक, प्रतिबंध और टैरिफ लगाने से पश्चिमी देश भारत को रूस से बेहतर तेल सौदा देने की स्थिति में नहीं आ पा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल की आपूर्ति जारी रखने को तैयार है।

