बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि मृतक के परिजनों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।
सुनवाई के दौरान बिहार सरकार की ओर से एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) आयोग के सामने पेश हुए। उन्होंने मामले की विस्तृत रिपोर्ट जमा करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, जिसे आयोग ने रिकॉर्ड में लिया।
आयोग ने सरकार की इस मांग को स्वीकार करते हुए समय सीमा तो बढ़ा दी, लेकिन साथ ही पीड़ित परिवार को तुरंत वित्तीय राहत पहुंचाने का निर्देश भी जारी कर दिया। बता दें कि मानवाधिकार आयोग में यह पूरी कानूनी लड़ाई मानवाधिकार अधिवक्ता एसके झा की याचिका पर चल रही है।
अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी
पीड़ित पक्ष की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने आयोग के सामने दलील दी कि पीड़ित परिवार को हर हाल में न्याय मिलना चाहिए और कानून का उल्लंघन करने वाले दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है।
आपको बता दें कि यह पूरा मामला जून 2026 का है। भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले 28 वर्षीय छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता भरत भूषण तिवारी को 17 जून 2026 को पुलिस और एसटीएफ की टीम ने एक कथित मुठभेड़ में गोली मार दी थी।
जिसके बाद इलाज के दौरान पटना के पीएमसीएच में उनकी मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि भरत हवा में फायरिंग कर रहे थे और आत्मरक्षा में गोली चलाई गई।

