बिहार में सरकारी आवासों का बदला रंग, सियासी संदेश या महज रंग-रोगन?

बिहार में सरकारी आवासों का बदला रंग, सियासी संदेश या महज रंग-रोगन?

पटना : बिहार में अब राजनीति सिर्फ विचारों से नहीं, रंगों से भी पहचानी जाएगी। अब तक विधायकों के सरकारी आवास हरे रंग के गेट और बोर्ड से सजे रहते थे, लेकिन अब उनका रंग बदला जा रहा है। ऐसा लगता है कि अब जनता को नामपट्ट पढ़ने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी—बंगले का रंग ही बता देगा कि अंदर किस पार्टी के नेता का ठिकाना है। यानी बिहार की सियासत में अब रंग भी अपनी राजनीतिक पहचान दर्ज कराने लगे हैं।

बिहार के माननीयों के आवास का रंग अब बदलने लगा है। इसी कड़ी में आप पूर्व डिप्टी सीएम रेणु देवी का आवास देख सकते हैं। उनके आवास का रंग नारंगी रंग से रंगा जा चुका है। यही नहीं, नेम प्लेट का रंग भी बदलकर नारंगी जैसा यानी भगवा रंग में रंगा जा चुका है। इतना देख कर जिसे न पता हो, वो अंदाजा लगा लेगा कि ये आवास बीजेपी की विधायक का है। दरअसल बीजेपी पार्टी के झंडे का रंग भी यही है

हालांकि इन रंगों का बदलना एक संयोग भी कहा जा सकता है। कोई भी मकान एक समय के बाद मरम्मत और रंग रोगन खोजता ही है। ऐसे में बात अगर विधायकों मंत्रियों के सरकारी आवास की हो तो उसे भी ऐसी जरूरत पड़ती ही है। लेकिन रंगों का चुनाव भी बड़ा सोच समझ कर किया गया है।

रंग तो सांकेतिक रूप मात्र हैं। हालांकि बिहार की राजनीति में झंडों के रंग से भी काफी कुछ तय हो जाता है। ये तो सरकारी आवास हैं। इसे संयोग भी कह सकते हैं” –डॉ संजय कुमार, पॉलिटिकल एक्सपर्ट एवं शिक्षाविद्

वहीं आपको ये भी बता दें कि राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव जब तक 10 सर्कुलर रोड आवास में रहे, उसे चारों तरफ से अपनी पार्टी के झंडे के मूल रंग हरे से सजाए रखा। यहां तक की पार्टी के सिंबल लालटेन ने भी 10 सर्कुलर रोड आवास की शोभा बढ़ाई। सिंबल के तौर पर एक बड़ा सा लालटेन भी 10 सर्कुलर रोड आवास पर लगातार टंगा रहा। लेकिन आवास खाली करने के बाद लालटेन को वहां से हटा दिया गया। आप ये भी कह सकते हैं कि बिहार की राजनीति में सिर्फ नेता और जनता ही नहीं, बल्कि रंगों का भी उतना ही महत्व होता है।

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