बिहार के खगड़िया में एक कथित फर्जी IAS अधिकारी मनीष कुमार गुप्ता को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि वह अधिकारी जैसा पहनावा, बातचीत और रहन-सहन रखकर लोगों को प्रभावित करता था।
शनिवार को पुलिस ने गोगरी-जमालपुर स्थित उसके घर पर छापेमारी की। उसके आलीशान घर, विदेशी गाड़ी और रहन-सहन को देखकर आसपास के लोग भी उसे केंद्र सरकार का बड़ा अधिकारी मानते थे।
फर्जी IAS कार्ड दिखाकर बनाता था रौब
पुलिस के मुताबिक, मनीष कथित तौर पर फर्जी IAS पहचान पत्र दिखाकर लोगों पर अपना प्रभाव जमाता था। वह घर से ही रहकर अपना पूरा रौब बनाए रखता था।
गोगरी-जमालपुर में उसका करोड़ों रुपये का आलीशान मकान बताया जा रहा है। उसके रहन-सहन और बातचीत के अंदाज की वजह से लोग लंबे समय तक उसके असली पहचान पर शक नहीं कर पाए। हालांकि, पुलिस की जांच के बाद उसकी कथित फर्जी पहचान का खुलासा हो गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की कार्रवाई से सामने आया सच
एसपी भानू प्रताप सिंह के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मनीष को पकड़ा। उसके खिलाफ पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने फर्जी IAS बनकर कितने लोगों को प्रभावित किया।
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में भी चर्चा है कि पुलिस की सख्ती से ऐसे फर्जी अधिकारियों पर लगाम लगाई जा सकती है। लोग अपने घरों से सीधे एसपी से मिलने एसपी कार्यालय आ जाते हैं। एसपी उनकी समस्याओं को बारीकी से सुनते हैं और निदान को लेकर त्वरित कार्रवाई भी करते हैं।
एसपी द्वारा इंटरनेट मीडिया पर हाल ही में एक पोर्टल बनाया गया है, जिसमें लोगों से अपील की गई है कि वे बिना भय के किसी तरह की सूचना दें, त्वरित कार्रवाई होगी और उनका नाम गुप्त रखा जाएगा। जानकारी के अनुसार उसी पोर्टल पर फर्जी आईएएस मनीष गुप्ता के बारे में किसी ने महत्वपूर्ण सूचना दी।
एसपी ने टीम गठित की और त्वरित कार्रवाई की गई। पुलिस और डीआईयू टीम की गोगरी जमालपुर स्थित मनीष गुप्ता के घर पर की गई छापेमारी के बाद सारे राज सामने आ गए।
फर्जी आईएएस के यहां छापेमारी चल रही थी
बताया जाता है कि फर्जी आईएएस मनीष गुप्ता के यहां पुलिस छापेमारी चल रही थी और दिल्ली से पटना तक के कई ताकतवर लोग वरीय पुलिस अधिकारी से पैरवी को लेकर फोन करते रहे।
इससे जाहिर होता है कि मनीष अपना भौकाल दिल्ली से पटना तक कायम किए हुए था। कई लोगों का तो यह भी कहना हुआ कि खगड़िया एसपी के रूप में भानू प्रताप सिंह नहीं होते, तो आसानी से मनीष गुप्ता को जाल में नहीं फंसाया जा सकता था।
एसपी भानू प्रताप सिंह ने समय पर कार्रवाई की और मनीष गुप्ता को भागने का कोई अवसर नहीं मिला। वह पुलिस की मजबूत घेराबंदी में फंस गया।
गोगरी-जमालपुर के कई लोगों का कहना है कि उसके करोड़ों रुपये के मकान का कई वर्षों से निर्माण हो रहा है। एक प्राध्यापक के पुत्र कम समय में करोड़ों का मालिक कैसे बन गया, यह पुलिस टीम को भी अचंभित कर गया।
दिल्ली से लेकर कई शहरों में उसकी संपत्ति होने की बात कही जा रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि विदेशों में भी उसकी संपत्ति है।
बहरहाल, फर्जी धंधे में संलिप्त कितना ही ताकतवर क्यों ना हो, पुलिस और कानून से नहीं बच सकता है, यही मनीष गुप्ता के साथ हुआ।
बता दें कि मनीष कुमार गुप्ता लंबे समय से फर्जी आईएएस बनकर अपना भौकाल कायम किए हुए था। कई अधिकारी आए और चले गए, मगर किन्हीं की नजर इस नटवरलाल पर नहीं पड़ी।
सूत्रों के अनुसार कहीं ना कहीं मैनेज के बल पर वह भौकाल कायम किए हुए था। उसके घर पर छापेमारी और उसकी गिरफ्तारी के बाद सच सामने आया।
मोबाइलों के सीडीआर खोलेंगे राज
पुलिस और डीआइयू टीम द्वारा उसके घर से विभिन्न कंपनियों के पांच मोबाइल जब्त किए गए हैं। मोबाइलों का लॉक खोलने को लेकर पुलिस लगातार प्रयास की।
परंतु गिरफ्तार मनीष लॉक बताने से परहेज करते रहा। ऐसे में अंदेशा है कि मोबाइल में बड़े- बड़े राज छुपे हुए हैं। एसपी भानू प्रताप सिंह द्वारा टीम को निर्देश दिया गया है कि उसके स्वजन अथवा किसी तकनीक का सहारा लेकर मोबाइल का लॉक खोलकर उसकी गहन जांच की जाए।
पूरी संभावना है कि मोबाइल का सीडीआर निकालने बाद जब गहन जांच होगी, तो कई बड़े- बड़े लोग जांच के घेरे में आ सकते हैं। कई सफेदपोश पर से भी पर्दा उठा सकता है।

