पाकिस्तान में सेना की भूमिका और मजबूत हो गई है। देश ने अब एक केंद्रीकृत सैन्य कमांड सिस्टम की ओर कदम बढ़ाया है। इसके तहत सेना, नौसेना और वायुसेना को फील्ड मार्शल असीम मुनीर के नेतृत्व वाले ढांचे के तहत लाया गया है।
मुनीर पहले से ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) हैं।
संसद ने कानून में किए बदलाव
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट ने 20 अगस्त को डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट 2026 और नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट 2010 में संशोधनों को मंजूरी दी।
इन बदलावों के बाद CDF का पद और ज्यादा शक्तिशाली हो गया है। यह बदलाव 2025 में किए गए संवैधानिक संशोधनों के बाद हुआ है।
असीम मुनीर की बढ़ी ताकत
नए कानून के बाद असीम मुनीर पाकिस्तान के सैन्य कमांड सिस्टम के केंद्र में आ गए हैं। वे प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार होंगे और सशस्त्र बलों के ऑपरेशनल कमांड और कंट्रोल की जिम्मेदारी भी उनके पास होगी।
तीनों सेनाओं के बीच तालमेल की जिम्मेदारी
नए कानून के तहत एक डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर बनाया जाएगा, जो CDF के अधिकार में रहेगा।
इस व्यवस्था के जरिए सेना, नौसेना और वायुसेना के साथ-साथ संयुक्त और रणनीतिक सैन्य अभियानों में बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जाएगी।
इस बदलाव के बाद पाकिस्तान में सैन्य फैसलों पर असीम मुनीर की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।
“असीम मुनीर राष्ट्रीय सुरक्षा नीति पर अपने प्रधानमंत्री को सलाह दे सकते हैं और सशस्त्र बलों में सैन्य फैसलों के अमल की निगरानी कर सकते हैं। राजनीतिक प्रभाव और ऑपरेशनल कमांड का मेल उनको शांति और संकट, दोनों स्थितियों में सलाहकार और कार्यकारी भूमिका देता है-” पाकिस्तानी एक्सपर्ट
नए कानून में क्या है
यह कानून CDF को जमीन, हवा, समुद्र, साइबर और स्ट्रैटेजिक डोमेन में तीनों सेनाओं के एकीकरण, ऑपरेशनल तालमेल और कोऑर्डिनेशन को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपता है।
ये दिखाता है कि पाकिस्तान अब तीनों सेनाओं के अलग-अलग कमांड स्ट्रक्चर के जरिए काम करने के तरीके से हट रही हैं। पाकिस्तान अब मुनीर के नेतृत्व में एक ढांचे की ओर बढ़ रहा है।
मुनीर की ताकत सैन्य कर्मियों तक फैली हुई है। यह एक्ट उनको कर्मियों को रिटायर करने, रिलीज या डिस्चार्ज करने, इस्तीफे स्वीकार या अस्वीकार करने, लोगों को सेवा में बनाए रखने और कानून की सीमाओं के भीतर रिटायरमेंट की उम्र या सेवा की शर्तों में ढील देने की इजाजत देता है। इससे पाकिस्तान की सशस्त्र सेनाओं के ढांचे का नियंत्रण मुनीर के हाथों में आ जाता है।
न्यूक्लियर कमांड पर असर
इन बदलावों का पाकिस्तान के स्ट्रैटेजिक और न्यूक्लियर कमांड ढांचे पर भी असर होगा। इसका मतलब यह नहीं है कि हर न्यूक्लियर फैसला सीधे CDF लेगा लेकिन नए स्ट्रैटेजिक कमांड सिस्टम बनाने से पुराने जॉइंट-सर्विसेज ढांचे का महत्व कम हो जाता है और आर्मी के नेतृत्व वाले सिस्टम का महत्व बढ़ जाता है।
नई दिल्ली में सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि क्या पाकिस्तान का डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर सच में ऑपरेशनल नर्व सेंटर बनता है या मौजूदा कंट्रोल का सिर्फ कानूनी रीब्रांडिंग बनकर रह जाता है।

