पटना में जमीन की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री को लेकर जिला प्रशासन ने सर्किल रेट (न्यूनतम बाजार मूल्य) में बदलाव करते हुए नई दरें जारी कर दी हैं। प्रशासन ने विभिन्न इलाकों और जमीन की श्रेणियों के आधार पर नए मूल्य निर्धारित किए हैं। नई दरों के अनुसार, शहर के प्रमुख और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे डाकबंगला चौराहा, बोरिंग रोड और गांधी मैदान के आसपास की जमीनों का सर्किल रेट सबसे अधिक तय किया गया है। माना जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री पर अधिक शुल्क देना पड़ सकता है।
नई गाइडलाइन के अनुसार जमीन को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। इनमें आवासीय, व्यावसायिक, मिश्रित उपयोग, कृषि, संस्थागत और खुली भूमि जैसी श्रेणियां शामिल हैं। पहले कई मामलों में एक ही इलाके की अलग-अलग प्रकृति वाली जमीनों का मूल्यांकन समान दर पर हो जाता था। अब जमीन के वास्तविक उपयोग को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग दरें तय की गई हैं।
पटना में जमीन रजिस्ट्री के लिए नया मार्केट वैल्यू रेट (एमवीआर) लागू कर दिया गया है। जिला निबंधन कार्यालय की ओर से जारी नई दरों के अनुसार राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में जमीनों की सरकारी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रशासन का कहना है कि नई दरें वर्तमान बाजार स्थिति को ध्यान में रखकर तय की गई हैं, जिससे रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। नई एमवीआर सूची शुक्रवार से प्रभावी हो गई है और इसकी जानकारी जिला निबंधन कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर भी प्रदर्शित कर दी गई है।
नई दरों के अनुसार गांधी मैदान के चारों ओर, बोरिंग रोड, एग्जीबिशन रोड, फ्रेजर रोड और डाकबंगला जैसे व्यावसायिक इलाकों की जमीनें सबसे महंगी श्रेणी में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में प्रति कट्ठा एमवीआर बढ़कर 2.50 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
इन इलाकों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों, बेहतर कनेक्टिविटी और ऊंची मांग को देखते हुए प्रशासन ने उच्च मूल्य निर्धारण किया है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों की जमीनों की बाजार कीमत पहले से ही काफी ऊंची थी, जिसे अब सरकारी दरों में भी प्रतिबिंबित किया गया है।
राजाबाजार और आसपास के क्षेत्रों में पहले प्रति कट्ठा जमीन का सर्किल रेट 93.75 लाख रुपये था, जिसे बढ़ाकर लगभग 1.85 करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं पाटलिपुत्र कॉलोनी, कंकड़बाग और लालजी टोला जैसे इलाकों में प्रति कट्ठा एमवीआर 2.18 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
पुराने बाइपास क्षेत्र और तेजी से विकसित हो रहे अन्य हिस्सों में भी जमीन की सरकारी कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। इससे इन क्षेत्रों में जमीन खरीदने वालों को अब अधिक स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क का भुगतान करना होगा।
सर्किल रेट बढ़ने या श्रेणी बदलने का सीधा असर रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी पर पड़ेगा। जिन क्षेत्रों में न्यूनतम बाजार मूल्य बढ़ा है, वहां जमीन खरीदने वालों को अधिक रजिस्ट्री शुल्क देना पड़ सकता है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि नए रेट वास्तविक बाजार स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, जिससे सरकारी राजस्व में भी वृद्धि होगी और जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता आएगी।
निवेशकों के लिए होगा क्या बदलाव ?
नई दरें लागू होने के बाद जमीन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को रजिस्ट्री से पहले संबंधित क्षेत्र का नया सर्किल रेट जरूर जांचना चाहिए। निवेशकों के लिए भी यह महत्वपूर्ण है क्योंकि जमीन की सरकारी कीमत बढ़ने से भविष्य में संपत्ति का मूल्यांकन और ऋण प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

