नई दिल्ली: नीट पेपर लीक मामले और सीजेपी के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई करना काफी नहीं है, उन छात्रों के बारे में भी सोचना चाहिए जिनका भविष्य इस विवाद से प्रभावित हुआ है।
ओवैसी ने कहा, “जिन छात्रों की मौत हो गई, उनका क्या? जिन छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी, लेकिन वे पहले जैसी रैंक नहीं ला सके, उनका क्या? उनका समय और मेहनत दोनों बर्बाद हो गए।”
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल दोषियों को सजा देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन छात्रों के लिए भी कदम उठाने चाहिए, जिन्हें इस पूरे मामले में नुकसान हुआ है।
राष्ट्रीय महत्व के कई विषयों पर भी चर्चा जरूरी है
वहीं, झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि सभी विपक्षी दल चाहते हैं कि संसद सुचारू रूप से चले, क्योंकि सांसदों के पास अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे हैं और राष्ट्रीय महत्व के कई विषयों पर भी चर्चा जरूरी है। सर्वदलीय बैठक में भी विपक्ष ने स्पष्ट किया था कि वह उन मुद्दों पर बहस चाहता है जिन पर देश जवाब मांग रहा है।
दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस्तीफे की मांग दोहराई
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने नीट विवाद को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश की गई है। सिविल ड्रेस में मौजूद लोगों द्वारा लाठीचार्ज किया जाना गंभीर मामला है और संसद में इस मुद्दे को उठाना जरूरी है।

