जंगलों पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, कहा- झारखंड जैसे कुछ राज्यों में प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को हर हाल में बचाना है आवश्यक

जंगलों पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता, कहा- झारखंड जैसे कुछ राज्यों में प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को हर हाल में बचाना है आवश्यक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पूरे भारत में जंगलों को बचाने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि झारखंड जैसे कुछ राज्यों में प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र हैं जिन्हें सहेजकर रखना आवश्यक है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां कीं।

पीठ ने जेएसपीसीबी की ओर से पेश वकील से कहा कि कुछ ही राज्य ऐसे हैं, जहां हम सचमुच अपने प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बचा सकते हैं और झारखंड उनमें से एक हैं। उसने कहा कि कुछ राज्यों में जंगल जैसी प्राकृतिक सुंदरता वाली जगहें हैं, जिन्हें बचाने की जरूरत है। शीर्ष अदालत झारखंड उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

झारखंड हाईकोर्ट ने अप्रैल में जंगलों या वन भूमि की सीमाओं के पास पत्थरों के उत्खनन या पत्थर तोड़ने वाली मशीनें स्थापित करने के लिए मंजूरी के सिलसिले में कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। जनवरी में उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि राज्य के भीतर संरक्षित वनों की तय सीमाओं से एक किलोमीटर के दायरे में पत्थर के उत्खनन या पत्थर तोड़ने वाली मशीनें स्थापित करने के लिए कोई मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।

हाईकोर्ट ने यह आदेश जेएसपीसीबी की उस अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया था, जिसके तहत जंगल या वन भूमि के आसपास पत्थर के उत्खनन और पत्थर तोड़ने वाली मशीनें स्थापित करने के लिए निर्धारित न्यूनतम दूरी को 400-500 मीटर से घटाकर 250 मीटर कर दिया गया था।

वहीं बता दें कि अप्रैल में पारित आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा था कि मंजूरी देने पर लगी रोक पत्थर के उत्खनन के मामले में जंगल या वन भूमि की सीमाओं से 500 मीटर के दायरे में, जबकि पत्थर तोड़ने वाली मशीनों के मामले में 400 मीटर के दायरे में लागू होगी। शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को जेएसपीसीबी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि बोर्ड ने अचानक दूरी कम कर दी थी।

जेएसपीसीबी के वकील ने उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का जिक्र किया और कहा कि सब कुछ रुका हुआ है। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय मामले पर विचार कर रहा है और वहां इसकी अंतिम सुनवाई होनी है। उसने कहा कि हाईकोर्ट को अंतिम आदेश देने दें। जब जेएसपीसीबी के वकील ने उच्च न्यायालय की टिप्पणियों का जिक्र किया, तो पीठ ने कहा कि हम अपने उच्च न्यायालयों का मनोबल नहीं गिरा सकते। हम कोई ‘हेडमास्टर’ नहीं हैं, जो उच्च न्यायालयों को सलाह दें कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। उच्च न्यायालय संवैधानिक अदालतें हैं।

जब पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, तो जेएसपीसीबी के वकील ने कहा कि वह याचिका वापस ले लेंगे। पीठ ने जेएसपीसीबी के वकील को याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी। उसने कहा कि याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय के सामने सभी मुद्दे उठाने के लिए स्वतंत्र होगा।

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