पेरिस के मशहूर एफिल टावर में BAPS से जुड़े आध्यात्मिक गुरुओं के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को उनके काम की जगह से हटाने के मामले पर विवाद बढ़ गया है। इस मामले को लेकर भारत में भी सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि किसी कर्मचारी के साथ उसके लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ, वह भारत की सोच, नीतियों या संविधान की भावना को नहीं दर्शाता।
प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि महिला और पुरुष, दोनों को अपनी नौकरी की जिम्मेदारियां निभाने का समान अधिकार होना चाहिए। किसी को सिर्फ उसके लिंग की वजह से काम करने से रोकना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर BAPS अपने धार्मिक समुदाय या संगठन के अंदर इस तरह के नियम रखता है, तो उसे अपने सीमित दायरे तक ही रखना चाहिए। दुनिया से ऐसे नियमों का पालन करने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना शनिवार की बताई जा रही है। BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टावर का दौरा किया था।
आरोप है कि प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान कुछ महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटा दिया गया, ताकि धार्मिक समूह वहां से गुजर सके। उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया गया।
विरोध के बाद बंद हुआ एफिल टावर
इस घटना के विरोध में एफिल टावर के कर्मचारियों ने सोमवार को काम बंद कर दिया। कर्मचारियों के विरोध के कारण एफिल टावर को बंद करना पड़ा।
कर्मचारियों ने एक बयान जारी कर उन निर्देशों की आलोचना की, जिनके तहत महिला कर्मचारियों को केवल उनके लिंग के आधार पर काम की जगह से अलग किया गया था।
कर्मचारियों का कहना है कि किसी भी कर्मचारी के साथ उसकी लैंगिक पहचान के आधार पर कार्यस्थल पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

