भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सातवें दिन बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है. भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत पर जगदीशपुर SDPO, शाहपुर थाना के तत्कालीन SHO समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. भोजपुर एसपी राज ने इसकी पुष्टि की है. 17 जून को हुए एनकाउंटर के बाद से ही पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे थे. अब एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है.
17 जून को हुआ एनकाउंटर
पुलिस के अनुसार 17 जून की सुबह भरत तिवारी की गिरफ्तारी के लिए बिलौटी गांव में छापेमारी की गई थी. पुलिस का दावा है कि भरत ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी और बाद में मुठभेड़ हुई. जानकारी के मुताबिक भरत तिवारी का एक फेसबुक लाइव वीडियो भी सामने आया. वीडियो में वह खुद को निर्दोष बता रहा था. वीडियो के अंतिम हिस्से में वह हथियार फेंकते हुए दिखाई देता है और खुद को सरेंडर करने की बात कहता है. यहीं से पूरे मामले पर सवाल उठने शुरू हो गए.
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने एसपी को दिए आवेदन में दावा किया कि उनका बेटा बाढ़ विस्थापितों की समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहा था. आवेदन के मुताबिक, पुलिस टीम उसे जवइनियां गांव के विस्थापितों की समस्या दिखाने के बहाने अपने साथ ले गई थी. वहां फेसबुक लाइव के दौरान भरत ने हथियार फेंक दिया और आत्मसमर्पण कर दिया था. आशा देवी का आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे घेर लिया और जगदीशपुर SDPO के आदेश पर पांच गोलियां मार दीं.
बता देें कि एनकाउंटर वाले दिन पहली एफआईआर दर्ज हुई. इसमें भरत तिवारी, उसके पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को आरोपी बनाया गया. पिता और भाई पर सरंक्षण देने का आरोप लगाया गया.
पुलिस ने दावा किया कि भरत ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस पर फायरिंग की थी. एफआईआर में कहा गया कि वह छत पर चढ़ गया और पुलिस टीम को निशाना बनाकर गोली चलाने लगा.
17 जून को दूसरी FIR दर्ज
बता दें कि उसी दिन दूसरी एफआईआर दर्ज की गई. इसमें पुलिस ने दावा किया कि दोबारा छापेमारी के दौरान भरत हथियार लेकर भाग रहा था. पुलिस के अनुसार उसे कई बार सरेंडर करने को कहा गया. लेकिन उसने कथित रूप से पुलिस वाहन पर गोली चलाई. बाद में उसने सरेंडर का नाटक किया और फिर दोबारा फायरिंग की कोशिश की. एफआईआर के अनुसार आत्मरक्षा में STF जवान ने फायरिंग की, जिससे भरत घायल हुआ. बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

भरत तिवारी की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शव रखकर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया. पुलिस का आरोप है कि जाम हटाने पहुंची टीम पर पथराव किया गया और सरकारी काम में बाधा पहुंचाई गई. इस मामले में 13 नामजद और 50 से 60 अज्ञात लोगों के खिलाफ तीसरी एफआईआर दर्ज की गई.

भरत भूषण तिवारी केस में हुई बड़ी कार्रवाई
एनकाउंटर के सातवें दिन आशा देवी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई. एफआईआर में जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा, तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार और अन्य पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं. इससे पहले मामले में पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी किया जा चुका है. इनमें तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार, पु.अ.नि अंकित आर्यन, पु.अ.नि हरश्चिंद्र कुमार, स.अ.नि रामाशंकर यादव और महिला सिपाही मीरा कुमारी शामिल हैं.

