एक तरफ मासूम की मासूमियत थी, दूसरी तरफ इंसानियत को शर्मसार करने का आरोप। जिस बच्ची की चीखों पर कथित आरोपी का दिल नहीं पसीजा, वही गोली लगते ही ‘मम्मी… मम्मी…’ चिल्लाने लगा। अस्पताल में भी वह रातभर दर्द से कराहता रहा। जैसे ही लोगों को घटना की जानकारी मिली, मालवीय अस्पताल के बाहर गुस्से का सैलाब उमड़ पड़ा।
आरोपी के लिए मेडिकल स्टाफ में भी गहरी नाराजगी
आरोपित बसु सिंह उर्फ बबलू के प्रति न केवल आम लोगों में बल्कि मेडिकल स्टाफ में भी गहरी नाराजगी रही। पूरे समय पुलिस वहां मौजूद रही। दर्द बढ़ने पर वह बार-बार बेहोश हो रहा था। इस पर मंगलवार की रात ही सफदरजंग अस्पताल में रेफर किया गया। बुधवार सुबह अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई। पूछताछ शुरू होने से पहले ही वह फिर बेहोश हो गया। उसे फिर से सफदरजंग में भर्ती कराया गया।
बता दें कि मांडी गांव के पास जहां उसने एक सुनसान प्लाट में कार पार्क करके नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया था, मंगलवार की शाम पुलिस उसे उसी स्थान पर लेकर पहुंची। क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान वह एक एसआइ का पिस्टल झपटकर भागने लगा। पुलिस ने पीछा किया तो फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी।
इंसानियत को शर्मशार करने वाले इस कृत्य के बाद भी आरोपित को अपने किए पर कोई पछतावा नहीं है। पूछताछ में उसने कुबूल किया कि वारदात के बाद वह गुरुग्राम के चक्करपुर स्थित अपने घर गया। वहां उसने आराम से नहाया और फिर सुबह छह बजे बेखौफ होकर अपनी कैब की पहली सवारी (राइड) के लिए निकल पड़ा।
पुलिस ने जब उसे विकासपुरी से पकड़ा तो उसने ऐसे दिखाया कि कुछ हुआ ही न हो। न चेहरे पर कोई भाव, न आवाज में कोई लड़खड़ाहट। पुलिस के मुताबिक बेहद शातिर तरीके से वह चीजों को हैंडल कर रहा था। शुरू में वह बार-बार बयान बदलता रहा। पुलिस ने जब सारे सबूत दिखाए तब उसने दुष्कर्म के बाद हत्या की बात स्वीकारी।
आरोपित दो दिन की पुलिस रिमांड पर
अगली चुनौती शव बरामदगी की थी। बिना समय गंवाए पुलिस उसे लेकर मांडी की ओर निकली। रास्ते में ही जगह पूछी और उसकी निशानदेही पर शव बरामद किया। आरोपित फिलहाल दो दिन की पुलिस रिमांड पर है। वहीं, इस जघन्य हत्याकांड के बाद से ही बच्ची के परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है !

