VIP कार्यक्रमों में मेहमानों के पहुंचने से पहले खाने की सुरक्षा की खास जांच की जाती है। इसके लिए फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के फ़ूड इंस्पेक्टर और स्थानीय पुलिस के कॉन्स्टेबल पहले से ही आयोजन स्थल पर पहुंच जाते हैं।
हाल ही में NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती और सारंग लखानी की शादी में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। FDA के फ़ूड इंस्पेक्टरों ने मेन्यू में शामिल सभी व्यंजनों को पहले चखकर उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच की। इसके बाद खाने के सैंपल लेकर उन्हें सील किया गया और 72 घंटे तक पुलिस रिकॉर्ड में सुरक्षित रखा गया, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी जांच की जा सके।
यह स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल पहले जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट और फिर प्रोटोकॉल मिनिस्ट्री ने लागू किया था। इसकी वजह से फ़ूड इंस्पेक्टरों को अक्सर हफ़्ते में आधे समय तक VIP ड्यूटी पर जाना पड़ता है। खाना चखें या न चखें, यह सवाल FDA अधिकारियों को परेशान करता है, क्योंकि एक इंस्पेक्टर की VIP ड्यूटी कभी-कभी 13 दिनों तक चल सकती है।
VIP का खाना चखने पर FDA अफसर ने उठाए सवाल
फ़ूड डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी ने तो यहां तक पूछ लिया कि क्या हम गिनी पिग (प्रयोग के लिए इस्तेमाल होने वाले जानवर) हैं जिन पर प्रयोग किया जाए? हमारे लिए यात्रा का भी कोई इंतजाम नहीं किया जाता। इस प्रोटोकॉल के दायरे में आने वाले नेताओं का दायरा बहुत बड़ा है। इसमें विपक्ष के वे सदस्य भी शामिल हैं जो पब्लिक ऑफिस में हैं, जैसे सांसद राहुल गांधी, और RSS प्रमुख मोहन भागवत भी, जो किसी पब्लिक ऑफिस में नहीं हैं।
VIP फूड टेस्टिंग से डॉक्टरों ने बनाई दूरी
तीन महीने पहले तक, फ़ूड टेस्टर्स की टीम में एक तीसरा सदस्य भी होता था। JJ या सेंट जॉर्ज जैसे सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर। हालांकि, मेडिकल टीमों ने इसका विरोध किया और काम से हट गए। उनका तर्क था कि उनकी मुख्य ज़िम्मेदारी मरीजों की देखभाल करना है, न कि खाना चखना। बायकुला के JJ हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट संजय सुरासे के अनुसार, इसके लिए आधिकारिक लिखित आदेश एक हफ़्ते से कुछ ज़्यादा समय पहले आया था। वे कहते हैं कि हमें यह काम बहुत पहले ही कर लेना चाहिए था, लेकिन देर आए दुरुस्त आए।
रोज के काम होते हैं प्रभावित
VIP के लिए इंस्पेक्टरों की तैनाती की देखरेख करने वाले एक फूड सेफ़्टी ऑफिसर कहते हैं कि चार इंस्पेक्टर हफ्ते में तीन से चार दिन उपलब्ध नहीं होते। इससे हमारे रोजमर्रा के काम में देरी होती है, लेकिन हम सीनियर्स को इसकी वजह (VIP ड्यूटी) साफ-साफ बता देते हैं। FDA अधिकारियों ने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या गृह मंत्री अमित शाह कहीं जाते हैं, तो उनकी अपनी इंटरनल सिक्योरिटी टीमें प्रोटोकॉल के तहत सायनाइड टेस्ट करती हैं।
बता दें कि अधिकारियों को कार्यक्रम स्थल पर सभी पैक्ड सामान की भी जांच करनी होती है। एक फूड इंस्पेक्टर ने मुंबई में भागवत के कार्यक्रम के बाद का एक वाकया याद किया, जब उन्होंने लड्डू बांटने की इजाजत नहीं दी थी। उन्हें कार्यक्रम के बाद मिठाइयां बांटना पसंद है। लेकिन लड्डू एक्सपायरी डेट के करीब थे, इसलिए हमने उनसे कहा कि उन्हें खाया नहीं जा सकता। FDA कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने कहा कि उन्हें सरकार द्वारा तय प्रोटोकॉल के अनुसार काम करना होता है। अब तक उनके अधिकारियों की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक जानकारी उन तक नहीं पहुंची है। प्रोटोकॉल सेक्रेटरी राजेश गावंडे ने प्रेस के उन सवालों का जवाब नहीं दिया कि ‘फूड-टेस्टिंग’ की सुविधा के लिए कौन पात्र है।

