गिरिडीह। झारखंड की राजनीति में सुदिव्य कुमार सोनू का नाम उन नेताओं में शामिल रहा, जिन्होंने संगठनात्मक राजनीति से अपनी पहचान बनाते हुए विधानसभा और राज्य सरकार तक का लंबा सफर तय किया। वर्ष 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले सुदिव्य कुमार सोनू लंबे समय तक पार्टी और झारखंड आंदोलन से जुड़े रहे।
उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। दो विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने के बावजूद उन्होंने राजनीति और संगठन से दूरी नहीं बनाई। वर्ष 2019 में पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से विधायक बनने के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया।
1989 में झामुमो से शुरू किया राजनीतिक जीवन
सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 1989 में झारखंड मुक्ति मोर्चा से राजनीति की शुरुआत की। वह दिशोम गुरु शिबू सोरेन के साथ झारखंड आंदोलन से भी जुड़े रहे। आंदोलन के दौरान उनके खिलाफ एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आती रही।
राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वर्ष 1990 में उन्हें नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद संगठन में उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई और वर्ष 2003 में वह जिला अध्यक्ष बने।
वर्ष 2006 में उन्हें गिरिडीह जिला बीस सूत्री कार्यक्रम के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी मिली।
दो चुनाव हारने के बाद 2019 में पहली बार बने विधायक
सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 2009 में पहली बार गिरिडीह विधानसभा चुनाव लड़ा। इसके बाद वर्ष 2014 में उन्होंने दूसरी बार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई।
हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद वह संगठन और जनसंपर्क से लगातार जुड़े रहे।
उनके राजनीतिक संघर्ष का परिणाम वर्ष 2019 में सामने आया, जब वह पहली बार गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।
दूसरी बार विधायक बनने के बाद संभाली कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी
वर्ष 2024 में दोबारा विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को झारखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। उन्होंने नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, युवा कार्य एवं कला-संस्कृति के साथ तकनीकी एवं उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
उनकी प्राथमिकताओं में झारखंड के पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान दिलाना भी शामिल था। झारखंड को पर्यटन के क्षेत्र में देश के मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने का उनका सपना था।
वह राज्य में माइनिंग टूरिज्म की संभावनाओं को विकसित करने को लेकर भी प्रयासरत थे।
गिरिडीह में विकास योजनाओं को मिली गति
सुदिव्य कुमार सोनू के कार्यकाल के दौरान गिरिडीह जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, सड़क और शहरी विकास से संबंधित कई योजनाओं को गति मिली।
उनसे जुड़ी प्रमुख विकास योजनाओं में गिरिडीह में विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज की पहल के साथ महिला महाविद्यालय के नए स्वरूप का विकास शामिल रहा।
इसके अलावा चिड़ियाघर, बायोडायवर्सिटी पार्क, पुस्तकालय और विभिन्न मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालयों से जुड़ी परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया गया।
शिक्षा के क्षेत्र में जेसी बोस सीएम एक्सीलेंस स्कूल, पचम्बा सीएम एक्सीलेंस स्कूल और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से संबंधित विकास कार्यों को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
सोलर सिटी से लेकर मरीन ड्राइव तक कई योजनाएं
गिरिडीह को झारखंड का पहला सोलर सिटी बनाने की उपलब्धि भी उनके कार्यकाल से जुड़ी रही। इसके अलावा प्रतिदिन 50 हजार लीटर क्षमता वाली मेधा डेयरी परियोजना, फोरलेन निर्माण और बायपास सड़क की स्वीकृति जैसी योजनाओं को भी क्षेत्र के विकास से जोड़कर देखा जाता है।
पीरटांड़ में मेगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना को लेकर भी पहल की गई। वहीं, उसरी नदी के किनारे शास्त्री नगर से अरगाघाट तक मरीन ड्राइव के निर्माण की योजना और खंडोली एवं विभिन्न जलप्रपातों के सौंदर्यीकरण के कार्यों को भी गति मिली।
संघर्ष और संगठन के रास्ते बनाई अलग पहचान
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक जीवन संघर्ष, संगठन और जनसंपर्क से जुड़ा रहा। वर्ष 1989 में झामुमो के एक कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ उनका सफर संगठन की विभिन्न जिम्मेदारियों से गुजरते हुए विधायक और कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा।
उनके राजनीतिक जीवन और गिरिडीह के विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को उनके समर्थक लंबे समय तक याद रखेंगे। उनके निधन के बाद झारखंड की राजनीति में उनके योगदान और सार्वजनिक जीवन में निभाई गई भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।

