रांची। झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह के विधायक रहे सुदिव्य कुमार सोनू के अचानक निधन के बाद उनके राजनीतिक जीवन से जुड़े कई पहलुओं की चर्चा हो रही है। झारखंड आंदोलन से निकलकर एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में राजनीति शुरू करने वाले सुदिव्य सोनू ने अपनी मेहनत और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता के बल पर राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
उनके राजनीतिक सफर के बारे में बहुत कुछ सार्वजनिक रूप से जाना जाता है, लेकिन राजनीति में आने के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प रही। करीब छह महीने पहले एक निजी यूट्यूब चैनल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने खुद अपने जीवन और राजनीति में प्रवेश से जुड़े कई अनुभव साझा किए थे।
80 और 90 के दशक में अलग झारखंड आंदोलन से जुड़े अनुभव
सुदिव्य कुमार सोनू का परिवार लंबे समय तक राजनीति से दूर रहा। उनके अनुसार, परिवार की कई पीढ़ियां सरकारी नौकरियों से जुड़ी रही थीं। जब वह उत्तर बिहार में पढ़ाई कर रहे थे, उस समय झारखंड अलग राज्य आंदोलन अपने महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा था।
उन्होंने बातचीत के दौरान बताया था कि उस दौर में उनके कुछ सहपाठी और अन्य लोग अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर तंज कसते थे। उनसे कहा जाता था कि क्या वास्तव में अलग राज्य बन पाएगा।
इन अनुभवों का उनके मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। धीरे-धीरे उनके भीतर अपनी माटी, क्षेत्र और लोगों के अधिकारों को लेकर सोच मजबूत होती गई।
1989 में शिबू सोरेन से मुलाकात बनी टर्निंग पॉइंट
सुदिव्य कुमार सोनू के जीवन में वर्ष 1989 को एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। इसी दौरान डीएसपी बरनाड कीचिया के आवास पर उनकी मुलाकात झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झामुमो संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन से हुई।
सुदिव्य सोनू ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि शिबू सोरेन को जब उनके पढ़े-लिखे होने की जानकारी मिली तो उन्होंने उनसे झारखंड आंदोलन में युवाओं और शिक्षित लोगों की भूमिका को लेकर बात की।
उनके अनुसार, गुरुजी के शब्दों ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसके बाद उन्होंने राजनीति को केवल करियर के रूप में नहीं, बल्कि झारखंड और उसके अधिकारों की लड़ाई के माध्यम के रूप में देखा और आंदोलन से जुड़ गए।
राजनीति में आने के फैसले का परिवार में हुआ विरोध
राजनीति में सक्रिय होने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को परिवार की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा। मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण उनके पिता राजनीति को लेकर चिंतित रहते थे।
उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता को लगता था कि राजनीति में जाने से उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक परिवार में इस विषय को लेकर मतभेद की स्थिति बनी रही।
हालांकि, बाद के वर्षों में एक घटना ने परिवार के नजरिए में बदलाव ला दिया।
जब शिबू सोरेन पहुंचे सुदिव्य सोनू के घर
सुदिव्य कुमार सोनू के अनुसार, वर्ष 2004-05 के दौरान शिबू सोरेन उनके गिरिडीह स्थित घर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने सुदिव्य सोनू के पिता से भी मुलाकात की।
सुदिव्य सोनू ने बताया था कि शिबू सोरेन ने उनके पिता से बेटे के राजनीति और आंदोलन से जुड़ने को लेकर बातचीत की। इस मुलाकात के बाद उनके पिता का नजरिया बदल गया और परिवार ने उनके राजनीतिक जीवन को स्वीकार कर लिया।
सुदिव्य सोनू इसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण मानते थे। उनके अनुसार, इसके बाद परिवार की ओर से राजनीति में सक्रिय रहने को लेकर पहले जैसी आपत्ति नहीं रही।
कार्यकर्ता से मंत्री तक पहुंचा राजनीतिक सफर
झारखंड आंदोलन से जुड़ने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू ने लंबे समय तक संगठन में काम किया। चुनावी राजनीति में उन्हें शुरुआती दौर में हार का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति और संगठन से दूरी नहीं बनाई।
वर्ष 2019 में वह पहली बार गिरिडीह विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद 2024 में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की और राज्य सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुआ उनका सफर झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण मुकाम तक पहुंचा। उनके निधन के बाद उनके राजनीतिक जीवन के साथ-साथ झारखंड आंदोलन से जुड़ने और शिबू सोरेन के साथ उनके संबंधों की कहानी भी एक बार फिर चर्चा में है।

