सांसद की हिरासत का मामला पहुंचा संसद, स्पीकर ने मांगा जवाब
पटना। बिहार के नवादा में बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह को हिरासत में लिए जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों से निकलकर संसद तक पहुंच गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बिहार के मुख्य सचिव से जवाब मांगा है। 6 नवंबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, नवादा के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की भूमिका की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं। जांच में यदि किसी तरह की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना बन सकती है।
इस घटनाक्रम ने सांसदों के संसदीय विशेषाधिकार और जिला प्रशासन की कार्यशैली को लेकर बहस तेज कर दी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकलता है और अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
26 अक्टूबर को किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे सांसद
पूरा मामला 26 अक्टूबर 2026 का है। उस दिन नवादा में किसान अपनी जमीन के अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। बताया गया कि डैम या तालाब निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसान अपनी मांग उठा रहे थे। इसी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह भी पहुंचे थे।
सांसद के अनुसार, दोपहर करीब एक बजे नवादा टाउन में पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। उनके साथ कुछ अन्य नेताओं और प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस अकबरपुर थाना ले गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, बाद में शाम करीब साढ़े छह बजे उन्हें रिहा कर दिया गया।
सुधाकर सिंह का आरोप है कि उन्हें हिरासत में लेने की कार्रवाई जिला प्रशासन के आदेश और निगरानी में की गई। उन्होंने इस कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं।
FIR और गिरफ्तारी मेमो नहीं देने का लगाया आरोप
सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजे गए पत्र में दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें एफआईआर की प्रति, गिरफ्तारी मेमो, निरुद्धि आदेश या हिरासत में लेने का कोई लिखित आधार उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना है कि उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं बताया गया कि किस कानूनी प्रावधान के तहत रोका गया है।
सांसद ने बताया कि 26 अक्टूबर की शाम पटना से दिल्ली जाने के लिए उनकी तेजस राजधानी एक्सप्रेस में टिकट बुक थी। संसद का सत्र चल रहा था और उन्हें सदन की कार्यवाही में शामिल होना था। उनके मुताबिक, हिरासत के कारण उनकी संसदीय जिम्मेदारियां प्रभावित हुईं।
उन्होंने इस कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 तथा संसदीय विशेषाधिकारों से जुड़ा मामला बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि, हिरासत के समय पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से अपनाई गई पूरी प्रक्रिया का आधिकारिक विवरण अभी सामने आना बाकी है।
नियम 222, 223 और 229 का हवाला देकर उठाया विशेषाधिकार का सवाल
सुधाकर सिंह ने लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम 222 और 223 के तहत विशेषाधिकार का प्रश्न उठाया है। उन्होंने नियम 227 के तहत मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने का भी अनुरोध किया है।
इसके अलावा सांसद ने नियम 229 का हवाला देते हुए दावा किया कि किसी सांसद को गिरफ्तार या हिरासत में लिए जाने की स्थिति में संबंधित प्राधिकारी को लोकसभा अध्यक्ष को इसकी सूचना देनी होती है। उनके अनुसार, इस मामले में आवश्यक सूचना दिए जाने की जानकारी उन्हें नहीं मिली।
सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से बिहार सरकार के माध्यम से नवादा के अधिकारियों से हिरासत के कारण, कानूनी आधार और पूरी कार्रवाई का विवरण मांगने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई प्रतिशोधात्मक हो सकती है। यह आरोप फिलहाल सांसद की ओर से लगाए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
मुख्य सचिव को नोटिस, DM-SP की भूमिका जांच के दायरे में
6 नवंबर को प्रकाशित खबरों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बिहार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर पूरे घटनाक्रम पर जवाब मांगा है। साथ ही नवादा के डीएम और एसपी की भूमिका की जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
जांच में यह देखा जाएगा कि सांसद को हिरासत में लेने की कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई, उसका कानूनी आधार क्या था और क्या संबंधित नियमों का पालन किया गया। यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल इस मामले में नवादा पुलिस और जिला प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच और बिहार सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
सुधाकर सिंह की हिरासत का यह मामला अब केवल एक जिले की पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। इसके केंद्र में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई, सांसद के अधिकार और संसदीय विशेषाधिकार से जुड़े सवाल हैं। आने वाले दिनों में लोकसभा सचिवालय की कार्रवाई और प्रशासन के जवाब पर सभी की नजर रहेगी।

