रांची: झारखंड में जेपीएससी, जेएसएससी और सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जारी छात्र आंदोलन के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बातचीत के बाद जल ग्रहण किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन अपनी मांगों के पूरा होने तक जारी रहेगा।
वीडियो कॉल पर मिला समर्थन
बुधवार को सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र नाथ महतो से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों के शांतिपूर्ण संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य के लिए लड़ी जा रही है। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील भी की।
जल ग्रहण करने की दी सलाह
सोनम वांगचुक ने अनशन कर रहे छात्र नेता से स्वास्थ्य का ध्यान रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सत्याग्रह का उद्देश्य स्वयं को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि समाज और सरकार की अंतरात्मा को जगाना है। उन्होंने सुझाव दिया कि आंदोलन के दौरान कम से कम जल और आवश्यक तरल पदार्थ का सेवन करते रहना चाहिए ताकि लंबे संघर्ष के लिए स्वास्थ्य बना रहे।
स्वास्थ्य बिगड़ने की दी जानकारी
देवेंद्र नाथ महतो ने बातचीत के दौरान बताया कि वह 25 जुलाई से सत्याग्रह पर हैं और 2 अगस्त से अन्न तथा जल दोनों का त्याग कर चुके थे। उन्होंने कहा कि लगातार कमजोरी, सिरदर्द और शरीर में थकान महसूस हो रही है। चिकित्सकों ने भी उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है।
उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक उनके आदर्श रहे हैं और उनके आंदोलनों से ही उन्हें प्रेरणा मिली है। इसी कारण उन्होंने वांगचुक की अपील को स्वीकार करते हुए जल ग्रहण करने का निर्णय लिया।
आंदोलन जारी रखने का संकल्प
बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने आंदोलनकारियों से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह छात्रों के आंदोलन के साथ नैतिक समर्थन बनाए रखेंगे और समय-समय पर मार्गदर्शन भी देंगे।
वहीं, देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि आंदोलन अपनी मांगों के पूरा होने तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जल ग्रहण करने का फैसला आंदोलन समाप्त करने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

