सिंदरी (धनबाद): सिंदरी में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचिका सुश्री पंडित गौरंगी गौरी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कृष्ण की बाल लीलाओं को संसार की सकारात्मक, सुखद और आनंदमयी लीलाएं बताया। कथा के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग सुनकर भावविभोर हो गए।
श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में छिपा है आनंद और प्रेम का संदेश
कथावाचिका गौरंगी गौरी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में उनका सहज, आनंदमय और लोककल्याणकारी स्वरूप दिखाई देता है। उनकी बाल लीलाओं में वात्सल्य, प्रेम और समानता का संदेश समाहित है। उन्होंने बताया कि जब माता यशोदा वात्सल्य भाव से कन्हैया को पुकारती हैं, तो भगवान ठुमक-ठुमक कर उनके पास चले आते हैं। यह प्रसंग भक्तों के मन में माता और पुत्र के निश्छल प्रेम की भावना जगाता है।
कथा के दौरान उन्होंने भगवान शिव के श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप के दर्शन करने आने का प्रसंग भी सुनाया। कथा के अनुसार, माता यशोदा ने भगवान शिव से कहा कि उनके आने पर लल्ला रोने लगता है। इस पर महादेव ने घर में शिवलिंग स्थापित करने की बात कही। इसी प्रसंग से नंदेश्वर महादेव की कथा का वर्णन किया गया।
वामन भगवान के तीन पग भूमि दान की कथा सुनाई
श्रीमद्भागवत कथा के अगले प्रसंग में कथावाचिका ने भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार वामन भगवान ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान की लीला, कृपा और भक्ति का महत्व समझाया गया।
कथावाचिका ने कहा कि प्रभु की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। वहीं, उनकी कृपा के बिना मनुष्य सांसारिक सुख-सुविधाओं के बावजूद वास्तविक आनंद से वंचित रह सकता है।
कृष्ण जन्मोत्सव पर गूंजे भजन, भक्ति में झूमे श्रद्धालु
कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग भी भावपूर्ण ढंग से सुनाया गया। कथावाचिका ने बताया कि कंस के अत्याचारों के बीच वासुदेव भगवान श्रीकृष्ण को लेकर यमुना पार गोकुल पहुंचे और वहां नंद बाबा के घर उन्हें पहुंचा दिया। इसके बाद वे यशोदा के यहां जन्मी कन्या को लेकर वापस लौटे।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का प्रसंग आते ही कथा स्थल पर उत्साह और भक्ति का वातावरण बन गया। इस दौरान ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। कृष्ण जन्मोत्सव को भक्तों ने उत्साह और उल्लास के साथ मनाया।
कंस को मिली आकाशवाणी, भयभीत होकर लौटा महल
कथा के दौरान कंस और योगमाया के प्रसंग का भी वर्णन किया गया। कथावाचिका ने बताया कि जब कंस ने वासुदेव के हाथ से कन्या को छीनकर मारने का प्रयास किया, तो वह उसके हाथ से छूटकर आकाश में प्रकट हो गई। इसके बाद आकाशवाणी हुई कि कंस का वध करने वाला जन्म ले चुका है। यह सुनकर कंस भयभीत हो गया और अपने महल की ओर लौट गया।
सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कृष्ण की बाल लीलाओं, वामन अवतार और जन्मोत्सव के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया।
NEWS ANP के लिए सिंदरी से राज कुमार शर्मा के साथ प्रेम प्रकाश शर्मा की रिपोर्ट।

