धनबाद: सिंदरी क्षेत्र में मोहर्रम का पर्व शनिवार को पूरी श्रद्धा, अनुशासन और आपसी भाईचारे के माहौल में संपन्न हुआ। विभिन्न अखाड़ों की ओर से पारंपरिक ताजिया और झंडा जुलूस निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ।
आकर्षण का केंद्र रहा रंगामाटी मिल्लत अखाड़ा का ताजिया
मोहर्रम के अवसर पर रंगामाटी मिल्लत अखाड़ा से पारंपरिक ताजिया निकाला गया। आकर्षक सजावट और पारंपरिक शैली में तैयार ताजिया लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। वहीं रंगामाटी, सिंदरी डोंमगढ़ तथा गौशाला चूड़ी पट्टी के अखाड़ों के झंडे निर्धारित मार्गों से होते हुए सिंदरी थाना परिसर पहुंचे, जहां धार्मिक परंपराओं का शांतिपूर्ण ढंग से निर्वहन किया गया।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
पूरे आयोजन के दौरान सिंदरी थाना प्रभारी राजेश कुमार और गौशाला ओपी प्रभारी शंभू नाथ सिंह पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में मौजूद रहे। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। प्रशासन और पुलिस की सतर्कता तथा स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरे कार्यक्रम के दौरान कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
अखाड़ा समितियों और जनप्रतिनिधियों की रही सक्रिय भूमिका
रंगामाटी मिल्लत अखाड़ा की ओर से मो. शब्बीर, मो. जमाल खान, मो. सब्बू, मो. साबिर खान, हाजी मुन्ना, मो. सलीम और मो. हकीम ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर पूर्व पार्षद दिनेश सिंह, संतोष चौधरी, अजय कुमार और राजू पांडे भी मौजूद रहे।
सिंदरी डोंमगढ़ अखाड़ा की ओर से मो. गोल्डी, हाजी नसरुद्दीन खान, मो. इमरान खान और मुन्ना ने व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। कार्यक्रम में भाजपा नेता लक्की सिंह, वार्ड 54 के पार्षद नीरज सिंह, अनुभव शर्मा, संजय राय और राज बिहारी सिंह भी उपस्थित रहे।
वहीं गौशाला चूड़ी पट्टी अखाड़ा की ओर से जावेद अंसारी और अखाड़ा कमेटी के उस्ताद सज्जाद सिद्दीकी ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
हिंदू-मुस्लिम एकता का दिया संदेश
मोहर्रम के आयोजन में मुस्लिम समाज के साथ-साथ हिंदू समाज के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया। जुलूस मार्ग पर जगह-जगह राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पानी और शरबत की व्यवस्था की गई।
इस शांतिपूर्ण आयोजन ने एक बार फिर यह साबित किया कि सिंदरी केवल औद्योगिक नगरी ही नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहज़ीब, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे की मजबूत परंपरा का भी प्रतीक है। स्थानीय लोगों ने इसे सामाजिक एकता और सौहार्द का प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

