शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि की शुरुआत कलश स्थापना या घटस्थापना के साथ होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अनुष्ठान के बाद भक्त नौ दिनों तक देवी दुर्गा की आराधना और व्रत का संकल्प लेते हैं। कलश स्थापना को नवरात्रि पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
शारदीय नवरात्रि 2026 में कलश स्थापना का महत्व
हिंदू धर्म में कलश को शुभता, समृद्धि और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में देवी-देवताओं और नवग्रहों का आह्वान किया जाता है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा शुरू होती है।
पश्चिम बंगाल के ज्योतिषी राहुल डे के अनुसार, कलश स्थापना के बाद भक्त व्रत और शक्ति साधना का संकल्प लेते हैं। इसे नवरात्रि के धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
कलश स्थापना के लिए जरूरी पूजा सामग्री
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना करने के लिए इन सामग्रियों की व्यवस्था की जा सकती है:
- साफ तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश
- स्वच्छ जल और गंगाजल
- आम या अशोक के पत्ते
- लाल कपड़े में लिपटा नारियल
- कलावा या पवित्र धागा
- अक्षत, रोली, कुमकुम और हल्दी
- फूल और फूलों की माला
- दीपक, रुई की बत्ती, घी या तेल
- अगरबत्ती और कपूर
- सुपारी और सिक्का
- पूजा की थाली
- साफ और उपजाऊ मिट्टी
- जौ के बीज
पूजा शुरू करने से पहले सभी सामग्री एक जगह रख लें, ताकि अनुष्ठान के दौरान किसी वस्तु की कमी न हो।
कलश स्थापना कैसे करें? जानें सरल विधि
पहला चरण: पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। मिट्टी से भरे पात्र में जौ के बीज बोएं। चाहें तो कलश रखने के लिए चावल का छोटा ढेर भी बना सकते हैं।
दूसरा चरण: कलश को साफ पानी या गंगाजल से लगभग तीन-चौथाई भरें। इसमें अक्षत, सुपारी, सिक्का और परंपरा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री डालें। इसके बाद कलश के गले में कलावा बांधें।
तीसरा चरण: कलश के मुंह पर आम या अशोक के पांच अथवा सात पत्ते लगाएं। लाल कपड़े में लिपटे नारियल को पत्तों के ऊपर सावधानी से रखें। कलश पर रोली और कुमकुम का तिलक लगाएं तथा फूल और अक्षत अर्पित करें।
चौथा चरण: भगवान गणेश, देवी दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं का स्मरण करें। दीपक और अगरबत्ती जलाकर नैवेद्य अर्पित करें तथा आरती करें। इसके बाद मां शैलपुत्री की पूजा कर नवरात्रि व्रत का संकल्प लें।
पूजा की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
मां शैलपुत्री को पहले दिन क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को शुद्ध गाय के घी का भोग लगाने की धार्मिक मान्यता है। घी से बनी खीर या पेड़ा भी अर्पित किया जा सकता है। मान्यता है कि मां को घी का भोग लगाने से भक्तों को आरोग्य और शारीरिक शक्ति का आशीर्वाद मिलता है।
भोग अर्पित करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में वितरित किया जा सकता है।
पहले दिन के रंग को लेकर क्या है मान्यता?
नवरात्रि के पहले दिन के रंग को लेकर अलग-अलग परंपराओं में भिन्न मान्यताएं मिलती हैं। दिए गए विवरण के अनुसार, मां शैलपुत्री की पूजा में नारंगी रंग को विशेष महत्व दिया गया है। इसे उत्साह, ऊर्जा और सफलता का प्रतीक माना जाता है।
भक्त इस दिन नारंगी रंग के वस्त्र पहनकर पूजा कर सकते हैं। हालांकि, नवरात्रि के दिन के अनुसार निर्धारित रंगों की सूची अलग-अलग पंचांगों और परंपराओं में भिन्न हो सकती है।
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना, मां शैलपुत्री की आराधना और व्रत के संकल्प के साथ नौ दिवसीय पर्व की शुरुआत होती है। श्रद्धालु इन दिनों पूजा-पाठ, भजन और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

