सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने हाल ही में सोशल मीडिया पर “इश्क़ करो पार्टी” (IKP) का कॉन्सेप्ट शेयर किया और इसके मकसद और विज़न के बारे में विस्तार से बताया। पार्टी के नाम को लेकर लोगों की उत्सुकता और कन्फ्यूज़न को दूर करते हुए उन्होंने साफ़ किया कि यहाँ “इश्क़” (प्यार) का मतलब रोमांटिक रिश्तों से नहीं है, बल्कि देश और उसके लोगों के प्रति प्यार, समर्पण और एकता की भावना से है।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में काटजू ने कहा कि भारत अभी कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, जिनमें गरीबी, बेरोज़गारी, कुपोषण, हेल्थकेयर सुविधाओं की कमी, महंगाई और शिक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। उनका मानना है कि इन समस्याओं का समाधान तभी हो सकता है जब देश के लोग धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बंटे बिना एकजुट हों।
उन्होंने बताया कि “इश्क़ करो पार्टी” का मकसद लोगों के बीच राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना है। उनके अनुसार, जहाँ देश की विविधता उसकी ताकत है, वहीं राजनीतिक और सामाजिक कारण अक्सर इसी विविधता को बंटवारे का कारण बना देते हैं। इसलिए, समाज को एकजुट करने और साझा राष्ट्रीय हितों के लिए काम करने की ज़रूरत है।
पूर्व जज ने कहा कि उर्दू और सूफी परंपराओं में “इश्क़” का मतलब किसी ऊंचे आदर्श, सच्चाई या नेक मकसद के प्रति समर्पण है। इस कॉन्सेप्ट को देशभक्ति और जनसेवा से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे नागरिकों की ज़रूरत है जो व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज और देश की बेहतरी के लिए काम कर सकें।
अपने लेख में आज़ादी की लड़ाई के कई क्रांतिकारियों और विश्व इतिहास के प्रमुख नेताओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलाव हमेशा उन लोगों की कोशिशों से आए हैं जो अपने मकसद के प्रति गहरे समर्पण और जुनून से प्रेरित थे।
काटजू के अनुसार, IKP का मकसद ऐसे लोगों को एक साथ लाना है जो एक आधुनिक, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील भारत बनाने में योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल समाज में बढ़ती नफ़रत और बंटवारे की सोच के ख़िलाफ़ एक वैचारिक अभियान का काम करेगी।
गौरतलब है कि “इश्क़ करो पार्टी” नाम की घोषणा पर पहले सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई थीं। हालाँकि, काटजू ने साफ़ किया है कि यह कोई मज़ाकिया या प्रतीकात्मक पहल नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक बदलाव के मकसद से की गई एक गंभीर कोशिश है।

