सरायकेला। कुकड़ू प्रखंड में रात के समय खनिज परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार रात करीब 9:30 बजे कुकड़ू से सिरूम चौक होते हुए नीमडीह की ओर तिरपाल से ढके दो ओवरलोड हाइवा गुजरने की सूचना सामने आई। वाहनों की आवाजाही के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि रात के अंधेरे में तिरपाल ढककर ले जाए जा रहे दोनों हाइवा में बालू लदा था या गिट्टी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इस तरह खनिज परिवहन किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों ने कई सवाल उठाए हैं।
खनिज कहां से लोड हुआ, ई-चालान वैध था या नहीं?
ग्रामीणों ने सवाल किया है कि दोनों हाइवा में खनिज कहां से लोड किया गया था और इसे किस घाट या क्रशर से उठाया गया। इसके अलावा वाहनों के ई-चालान की वैधता, दर्ज मात्रा और वास्तविक लोड की भी जांच की मांग की गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि वाहन ओवरलोड थे तो परिवहन नियमों के तहत इसकी भी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने कहा कि स्रोत से लेकर गंतव्य तक पूरे परिवहन मार्ग की जानकारी सामने आनी चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
तिरुलडीह और नीमडीह थाना प्रभारियों से जांच की मांग
ग्रामीणों ने तिरुलडीह और नीमडीह थाना प्रभारी के साथ-साथ कुकड़ू एवं नीमडीह के अंचल अधिकारियों तथा जिला खनन पदाधिकारी से मामले की जांच कराने की अपील की है।
मांग की गई है कि हाइवा के लोडिंग स्थल, परिवहन मार्ग, ई-चालान, खनिज की दर्ज मात्रा और ओवरलोडिंग की स्थिति की जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जांच से ही यह पता चल सकेगा कि परिवहन नियमों का पालन हुआ था या नहीं।
अवैध परिवहन का आरोप, प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि तिरुलडीह नदी क्षेत्र से रात के समय बालू और गिट्टी का कथित अवैध परिवहन किया जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि खनिज को पश्चिम बंगाल और जमशेदपुर की ओर भेजा जाता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ वाहनों में चालान में दर्ज मात्रा से अधिक खनिज लोड कर तिरपाल से ढककर उन्हें रवाना किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
थाना प्रभारी से पक्ष लेने की कोशिश, नहीं मिला जवाब
मामले में जब तिरुलडीह थाना प्रभारी से फोन पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। ऐसे में पुलिस या प्रशासन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की संभावित कार्रवाई पर टिकी है।

