रायपुर, छत्तीसगढ़। अपनी कला और हुनर के दम पर छत्तीसगढ़ के रायपुर के दो भाई देशभर में पहचान बना रहे हैं। लक्ष्मी नारायण चक्रधारी और परमेश्वर चक्रधारी की बनाई मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। लोग उनकी शानदार कारीगरी और कलात्मक शैली की सराहना कर रहे हैं।
दोनों भाइयों की मूर्तियों में बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उनकी कला अब स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ से बाहर भी अलग-अलग राज्यों में पहुंच रही है।
बचपन से ही मूर्तियां बनाने का था शौक
लक्ष्मी नारायण चक्रधारी को बचपन से ही मूर्तियां बनाने में रुचि रही है। इसी लगाव को उन्होंने अपनी पढ़ाई और मेहनत के जरिए आगे बढ़ाया। उन्होंने खैरागढ़ स्थित राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय से मूर्तिकला में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स (BFA) की पढ़ाई पूरी की है।
कला की औपचारिक शिक्षा और लगातार अभ्यास ने उनके हुनर को निखारने में भूमिका निभाई। आज उनकी बनाई मूर्तियां लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
महादेव घाट के पास है दोनों भाइयों का कला केंद्र
लक्ष्मी नारायण और परमेश्वर चक्रधारी रायपुर में महादेव घाट के पास अपना कला केंद्र चलाते हैं। यहीं दोनों भाई अपनी रचनात्मकता और मूर्तिकला के कौशल को आकार देते हैं।
उनकी बनाई आकर्षक प्रतिमाएं अपनी बारीक कारीगरी और भव्य स्वरूप के कारण लोगों के बीच चर्चा में हैं। मां दुर्गा की प्रतिमा के सोशल मीडिया पर वायरल होने से उनकी कला को और अधिक लोगों तक पहुंचने का अवसर मिला है।
छत्तीसगढ़ की कला को मिल रही नई पहचान
दोनों भाइयों की मूर्तियां अब छत्तीसगढ़ से बाहर भी अलग-अलग राज्यों तक पहुंच रही हैं। यह उनकी कला के प्रति लोगों की रुचि और उनके काम की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
लक्ष्मी नारायण और परमेश्वर चक्रधारी की मेहनत इस बात का उदाहरण है कि पारंपरिक कला को समर्पण, अभ्यास और रचनात्मकता के साथ नई पहचान दिलाई जा सकती है। उनकी मूर्तिकला छत्तीसगढ़ की कला परंपरा को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने में योगदान दे रही है।

