प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने के मामले को लेकर सोमवार (3 अगस्त 2026) को संसदीय स्थायी समिति ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा के अधिकारियों के साथ बैठक की।
बैठक में मेटा ने वीडियो हटाने के लिए माफी मांगी। कंपनी ने कहा कि यह वीडियो तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलती से डिलीट हो गया था।
हालांकि, समिति के कई सदस्यों ने कहा कि सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं है। उनका मानना है कि इस मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और पूरी घटना की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा के मालिक मार्क जुकरबर्ग को भी इस मामले में माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब मेटा पर इस तरह का आरोप लगा है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2024 के चुनावों को लेकर दिए गए एक बयान पर भी मार्क जुकरबर्ग पहले माफी मांग चुके हैं।
निशिकांत दुबे ने कहा कि इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘जब भारत के प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जा सकता है और उन्होंने खुद माना कि कंटेंट पांच घंटे- रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक तक गायब था, तो यह बहुत गंभीर मामला है.
हमारी समिति ने दो बातें साफ तौर पर कही है कि माफी मार्क जुकरबर्ग की तरफ से आनी चाहिए. अगर जुकरबर्ग ऐसा नहीं करते हैं, तो उनसे सेक्शन 79 के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा वापस ले ली जानी चाहिए.‘

