धनबाद। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग स्थित ईआईएसीपी कार्यक्रम केंद्र द्वारा बोकारो जिले के पिंड्राजोरा में आयोजित एक सप्ताह का सिक्की आर्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हो गया।
यह कार्यक्रम झारखंड फाउंडेशन केंद्र के सहयोग से तथा भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का विषय “सस्टेनेबल लाइवलीहुड एंड कल्चरल प्रिजर्वेशन के लिए सिक्की आर्ट” रखा गया था।
पारंपरिक कला के जरिए रोजगार के अवसर तैयार करने पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक सिक्की कला को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण समुदायों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार करना था।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सिक्की कला के माध्यम से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी गई। साथ ही इस पारंपरिक कला को बाजार की जरूरतों के अनुरूप उत्पादों में बदलकर आमदनी के साधन के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
30 महिलाओं और प्रतिभागियों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में कुल 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें जेएसएलपीएस से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की महिला सदस्य और गृहिणियां शामिल थीं।
पांच दिनों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने सिक्की आर्ट से जुड़े विभिन्न कौशल सीखे। प्रशिक्षण में नए उत्पाद तैयार करने, पारंपरिक कला के विकास और इसके माध्यम से आजीविका के अवसर बढ़ाने पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय लोगों को कौशल के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना और महिलाओं की आजीविका को मजबूत करना भी था।
प्रतिभागियों के उत्पादों की मुख्य अतिथि ने की सराहना
समापन समारोह में झारखंड फाउंडेशन केंद्र की संस्थापक, एनजीओ संचालिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती रासू देवी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं।
उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए सिक्की उत्पादों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सिक्की जैसी पारंपरिक कलाओं को प्रोत्साहित करने से ग्रामीण महिलाओं के कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सकता है।
पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की पहल
आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के ईआईएसीपी कार्यक्रम केंद्र एवं पर्यावरण विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के कार्यक्रम अधिकारी बिश्वजीत दास ने प्रतिभागियों के उत्साह और प्रशिक्षण के दौरान तैयार किए गए उत्पादों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों ने पारंपरिक कला सीखने के साथ-साथ इसे उपयोगी और बाजार में बिकने योग्य उत्पादों में बदलने का कौशल भी सीखा। उन्होंने प्रशिक्षण से जुड़े प्रशिक्षकों श्रीमती नाजदा खातून और मोहम्मद जसीम के योगदान की भी सराहना की।
झारखंड फाउंडेशन केंद्र के कार्यकारी निदेशक डॉ. जयदेव महतो ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रतिभागियों द्वारा प्रशिक्षण के दौरान हासिल किए गए कौशल को महत्वपूर्ण बताया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को आगे बढ़ाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने तथा सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरणीय स्थिरता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया।

