पाकुड़: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पाकुड़ जिले में विभिन्न स्थानों पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसी क्रम में शहर के बाजार समिति परिसर में संथाल परगना हुल समिति के बैनर तले विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में समिति से जुड़े रामसिंह टुडू, मुखिया विकास गौड़, लखन हेम्ब्रम, मार्क बास्की समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
पारंपरिक नृत्य और गीत से सजा कार्यक्रम
विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने उत्साह के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों को सम्मानित भी किया गया।
आदिवासी अधिकारों और संस्कृति पर हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आदिवासी समाज के अधिकारों और उनकी सांस्कृतिक विरासत को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस का उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट सभ्यता और संस्कृति है, जिसे संरक्षित करना जरूरी है। विश्व आदिवासी दिवस के माध्यम से इन परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाता है।
जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज लंबे समय से जल, जंगल और जमीन के संरक्षण से जुड़ा रहा है। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में आदिवासी समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इसी उद्देश्य के साथ हर वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और आदिवासी संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित रखने का संदेश दिया।

