पाकुड़ में Startup Workshop, युवाओं को बताया गया कम लागत में बिजनेस शुरू करने का तरीका

पाकुड़ में Startup Workshop, युवाओं को बताया गया कम लागत में बिजनेस शुरू करने का तरीका

पाकुड़। जिले में उद्यमिता, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रविन्द्र भवन टाउन हॉल में तेजस जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने से लेकर सरकारी सहायता और बाजार से जुड़ने तक की जानकारी दी गई।

कार्यशाला का आयोजन उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), स्टार्टअप इंडिया, झारखंड सरकार और JIIDCO के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का उद्घाटन

कार्यशाला का उद्घाटन उपायुक्त मेघा भारद्वाज, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक राजेंद्र प्रसाद, सहायक निदेशक MSME धनबाद दीपक कुमार और JIIDCO रांची के अनमोल चक्रवती ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में स्टार्टअप इंडिया और तेजस पहल के तहत युवाओं को उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों से अवगत कराया गया।

Startup शुरू करने से लेकर Funding तक की जानकारी

कार्यशाला में प्रतिभागियों को स्टार्टअप शुरू करने की प्रक्रिया, व्यावसायिक विचारों को विकसित करने और उन्हें नवाचार में बदलने की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही क्षमता निर्माण, मेंटरशिप, इन्क्यूबेशन, वित्तीय सहयोग, बाजार से जुड़ाव और विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं के बारे में भी बताया गया।

विशेषज्ञों और संबंधित पदाधिकारियों ने युवाओं के सवालों और जिज्ञासाओं का समाधान किया। कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं को अपने व्यावसायिक विचारों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना रहा।

डीसी बोलीं- छोटी समस्या का समाधान बन सकता है Startup

उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि पाकुड़ जिले में स्टार्टअप और नवाचार की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने युवाओं से अपने आसपास की छोटी-छोटी समस्याओं को पहचानने और उनके सरल एवं व्यावहारिक समाधान तलाशने की दिशा में काम करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि स्टार्टअप शुरू करने के लिए हमेशा बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती। कई बार कम लागत या बिना बड़े खर्च के भी किसी समस्या का प्रभावी समाधान विकसित किया जा सकता है।

समस्या की पहचान से शुरू हो सकता है नया विचार

डीसी ने युवाओं को बताया कि किसी भी स्टार्टअप के लिए सबसे पहले समस्या की पहचान जरूरी है। इसके बाद उसके समाधान की सोच विकसित कर उस विचार को नवाचार के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है।

तेजस कार्यशाला के जरिए युवाओं को इसी सोच के साथ उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने और उपलब्ध सरकारी सहायता एवं संसाधनों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

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