पाकुड़: जिले की ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा का प्रतीक उल्टा रथ यात्रा इस वर्ष भी पूरे श्रद्धा, आस्था और भव्यता के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल और बिहार से भी हजारों श्रद्धालु पाकुड़ पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
राजबाड़ी मैदान से निकली भव्य रथ यात्रा
उल्टा रथ यात्रा की शुरुआत स्थानीय राजबाड़ी मैदान से हुई। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सुसज्जित रथ को शंखध्वनि, भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच पूरे शहर में भ्रमण कराया गया। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथ को खींचा, जबकि मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए मौजूद रहे।
1697 से चली आ रही है परंपरा
स्थानीय मान्यता के अनुसार, पाकुड़ राज के प्रथम राजा स्वर्गीय पृथ्वीचंद्र साही ने वर्ष 1697 में इस रथ यात्रा की शुरुआत की थी। तब से यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है और हर वर्ष शाही परंपराओं एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ इसका आयोजन किया जाता है।
एक माह तक चलता है रथ मेला
रथ यात्रा के साथ ही रथ मेला मैदान में भव्य मेले और सर्कस का भी आयोजन किया गया है। यह मेला लगभग एक महीने तक चलता है, जहां बड़ी संख्या में लोग खरीदारी, मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने पहुंचते हैं।

आस्था, संस्कृति और परंपरा का यह अनूठा उत्सव हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

