निरसा में MPL को लेकर सियासी टकराव तेज
निरसा। निरसा में एमपीएल विस्थापितों के मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता अशोक मंडल ने बारबंदिया स्थित अपने आवास पर एमपीएल विस्थापित मजदूरों के साथ बैठक की। बैठक में बड़ी संख्या में विस्थापित मजदूर मौजूद रहे।
इस दौरान अशोक मंडल ने निरसा विधायक अरूप चटर्जी और उनके समर्थकों पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने विस्थापितों के मुद्दे को लेकर विधायक की भूमिका पर सवाल उठाए।
1585 लोगों के पैनल का अशोक मंडल ने किया जिक्र
अशोक मंडल ने दावा किया कि एमपीएल के विस्थापन के समय 1585 लोगों का पैनल तैयार किया गया था। उनके अनुसार, इनमें से करीब 1500 लोगों को रोजगार दिया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि बाकी लोगों के जमीन संबंधी कागजात सही नहीं होने के कारण कुछ लोगों को राशि का भुगतान किया गया। अशोक मंडल का आरोप है कि इसके बावजूद विधायक लोगों को गुमराह करने और ठगने का काम कर रहे हैं।
विधायक पर MPL को लेकर राजनीति करने का आरोप
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि विधायक बाहरी लोगों के साथ बैठक कर विस्थापितों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एमपीएल को बंद कराने की कोशिश की जा रही है।
अशोक मंडल ने कहा कि यदि एमपीएल बंद होती है तो इससे हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी और निरसा के आर्थिक जीवन पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि एमपीएल से निरसा की पहचान जुड़ी हुई है और उनके अनुसार क्षेत्र को विकास की जरूरत है।
MPL गेट खोलने की दी चेतावनी
अशोक मंडल ने कहा कि पिछले तीन-चार दिनों से विधायक और उनके समर्थक विस्थापितों की मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके विरोध में अगले दिन एमपीएल का गेट खुलवाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने इसे आर-पार की लड़ाई बताते हुए कहा कि मजदूरों का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सांसद भी इस लड़ाई में उनके साथ रहेंगे।
विधायक के खिलाफ सबूत होने का दावा
अशोक मंडल ने आरोप लगाया कि विधायक और उनके कार्यकर्ताओं ने एमपीएल में किस तरह लाभ लिया है, इसके कई प्रमाण उनके पास हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रमाणों को सार्वजनिक करने पर विधायक की कथित भूमिका सामने आ जाएगी।
हालांकि, ये सभी आरोप भाजपा नेता अशोक मंडल की ओर से लगाए गए हैं। खबर लिखे जाने तक विधायक अरूप चटर्जी की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
