धनबाद। धनबाद के दो बहुचर्चित हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में हैं। एक मामला पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह और उनके साथ तीन अन्य लोगों की हत्या से जुड़ा है, जबकि दूसरा रंजय सिंह हत्याकांड है। दोनों मामलों में लंबी जांच, आरोप-प्रत्यारोप और कानूनी प्रक्रिया के बाद भी घटनाओं की पूरी सच्चाई को लेकर सवाल अब तक बने हुए हैं।
रंजय सिंह हत्याकांड में अदालत का फैसला आ चुका है, वहीं नीरज सिंह हत्याकांड में पुलिस की ओर से साक्ष्यों के अभाव में अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर अनुसंधान बंद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन घटनाक्रमों ने मृतकों के परिजनों और आम लोगों के बीच एक पुराना सवाल फिर खड़ा कर दिया है—आखिर इन हत्याओं के पीछे वास्तविक हत्यारे कौन थे?
नीरज सिंह हत्याकांड: नौ साल बाद जांच बंद
21 मार्च 2017 की शाम धनबाद के सरायढेला स्थित स्टीलगेट के पास पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने धनबाद ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड को झकझोर दिया था।
घटना के बाद पुलिस ने विभिन्न पहलुओं पर जांच की। मामले में कई लोगों के नाम सामने आए और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चली। हालांकि, बाद में पुलिस की ओर से साक्ष्यों के अभाव में अंतिम प्रतिवेदन दाखिल कर अनुसंधान बंद किए जाने की बात सामने आई।
इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने चर्चित मामले में जांच एजेंसी हत्या की पूरी सच्चाई तक क्यों नहीं पहुंच सकी। नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या के पीछे की वास्तविक कड़ी क्या थी, यह प्रश्न अब भी चर्चा में है। <Cite refs={[“turn0search8″,”turn0search13″,”turn0search16”]} />
रंजय सिंह हत्याकांड में हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह बरी
29 जनवरी 2017 को रंजय सिंह की हत्या ने भी धनबाद को हिला दिया था। रंजय सिंह को धनबाद के पूर्व मेयर संजीव सिंह का करीबी बताया जाता था। चंक्या नगर इलाके में गोलीबारी की घटना में उनकी जान चली गई थी।
करीब नौ वर्षों तक चले मुकदमे के बाद धनबाद की अदालत ने हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा को साक्ष्य के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की स्थिति के आधार पर आया। <Cite refs={[“turn0search2″,”turn0search3″,”turn0search4″,”turn0search5”]} />
अदालती राहत मिलने के बाद आरोपियों को कानूनी लाभ जरूर मिला, लेकिन इससे रंजय सिंह की हत्या से जुड़े सभी सवालों का सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर समाधान नहीं हो सका।
दोनों मामलों में अलग कानूनी स्थिति, लेकिन सवाल एक
नीरज सिंह और रंजय सिंह हत्याकांड की कानूनी परिस्थितियां अलग-अलग हैं। एक मामले में पुलिस ने अनुसंधान बंद कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल की, जबकि दूसरे में अदालत ने आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी किया।
कानून की दृष्टि से किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए ठोस और स्वीकार्य साक्ष्य आवश्यक होते हैं। इसलिए अदालत के फैसले या जांच की स्थिति से आगे बढ़कर किसी व्यक्ति को हत्यारा बताना उचित नहीं होगा।
फिर भी, दोनों घटनाओं में मृतकों के परिवार और आम लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि हत्या की वास्तविक योजना किसने बनाई, वारदात को अंजाम देने वाले लोग कौन थे और जांच के दौरान सामने आए सभी पहलुओं का अंतिम निष्कर्ष क्या रहा।
क्या कभी सामने आएगा हत्याओं का पूरा सच?
धनबाद में इन दोनों हत्याकांडों को कई वर्ष बीत चुके हैं। इस दौरान जांच हुई, गवाहों के बयान दर्ज हुए, अदालत में सुनवाई चली और कानूनी फैसले भी सामने आए। इसके बावजूद घटनाओं की पूरी सच्चाई को लेकर चर्चाएं समाप्त नहीं हुई हैं।
क्या जांच एजेंसियां निर्णायक साक्ष्य जुटाने में सफल नहीं हो सकीं? क्या गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी से मामले कमजोर हुए? या फिर कुछ ऐसे तथ्य हैं, जो अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं?
इन सवालों का निश्चित उत्तर संबंधित जांच दस्तावेजों और न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर ही दिया जा सकता है। फिलहाल तथ्य यही है कि नीरज सिंह और रंजय सिंह हत्याकांड में कानूनी घटनाक्रम सामने आने के बावजूद हत्या की पूरी सच्चाई को लेकर सवाल कायम हैं।
समय बीतने के साथ लोगों की उम्मीद अब भी यही है कि इन हत्याओं से जुड़े सभी अनुत्तरित सवालों का तथ्यात्मक और कानूनी समाधान कभी सामने आएगा।

