
रामलला के पहली दर्शन
500 वर्षो के इंतजार करने के बाद शालिग्राम पत्थर को प्रभु श्रीराम बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, सभी सनातनियों के जीवन में इससे बड़ा सौभाग्य का दिन कुछ भी नहीं हो सकता जिस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने जन्मभूमि अयोध्या में विराजेगे।कई पीढ़ियों के बलिदान है कई माताओं के पुत्रदान का प्रतीक है राम जन्मभूमि !
कई वर्षों की कठिन तपस्या रंग लाई।
22 जनवरी को पुरे विश्व मे दीपावली।।