रांची: झारखंड में खनिज अधिकारों और राज्य के राजस्व को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर पलटवार करते हुए केंद्र सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा झारखंड के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मूल सवाल का जवाब देने के बजाय मुद्दे को भटकाने का प्रयास कर रही है।
JMM की ओर से कहा गया कि खनिज संपदा झारखंड की धरती से निकलती है और खनन का सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभाव भी राज्य को झेलना पड़ता है। ऐसे में खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व और अधिकारों पर राज्य की भूमिका को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
JMBL सेस को लेकर JMM ने उठाए सवाल
JMM के अनुसार, खनिज वहन भूमि उपकर (JMBL Cess) कोई मनमाना कर नहीं है। पार्टी ने जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि खनिजयुक्त भूमि भी भूमि है और राज्यों को ऐसी भूमि पर कर लगाने का अधिकार है।
पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों के अधिकार को मान्यता दी है तो संसद के कानून के माध्यम से इस अधिकार को सीमित करने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।
JMM ने भाजपा से यह स्पष्ट करने की मांग की कि यदि प्रस्तावित व्यवस्था से राज्यों के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे, तो केंद्र को राज्यों द्वारा खनिजयुक्त भूमि पर लगाए जाने वाले कर, सेस या लेवी को शर्तों के अधीन करने की शक्ति क्यों चाहिए।
JMBL Cess से राजस्व का हवाला
JMM ने अपने बयान में JMBL Cess से राज्य को मिलने वाले संभावित राजस्व का भी उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार वर्ष 2024-25 में इससे लगभग 1,379 करोड़ रुपये, वर्ष 2025-26 में लगभग 7,488 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 में लगभग 13,215 करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान है।
पार्टी ने सवाल किया कि यदि इस राजस्व स्रोत को सीमित किया जाता है तो संभावित कमी की भरपाई किस माध्यम से होगी।
JMM ने यह भी कहा कि रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF और GST जैसे अलग-अलग राजस्व स्रोतों का हवाला देकर JMBL Cess से जुड़े सवाल को खत्म नहीं किया जा सकता। पार्टी के अनुसार ये सभी अलग-अलग राजस्व स्रोत हैं।
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास का मुद्दा उठाया
JMM ने कहा कि खनन गतिविधियों के कारण विस्थापन, पर्यावरणीय दबाव, जल और वायु पर असर तथा स्थानीय बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। पार्टी का कहना है कि आदिवासी और स्थानीय समुदायों को भी खनन का सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव झेलना पड़ता है।
पार्टी ने सवाल उठाया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, ग्रामीण विकास और आधारभूत संरचना के लिए राज्य को अतिरिक्त संसाधन जुटाने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए।
भाजपा सांसदों की चुप्पी पर भी सवाल
JMM ने झारखंड से निर्वाचित भाजपा सांसदों को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भाजपा के सांसदों की ओर से पर्याप्त सवाल नहीं उठाए जा रहे हैं।
JMM ने कहा कि यदि भाजपा को झारखंड के हितों की चिंता है तो उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य की खनिज संपदा से जुड़े निर्णयों में झारखंड की जनता और निर्वाचित सरकार की भूमिका क्या होगी।
‘संघीय ढांचे’ का हवाला देकर केंद्र पर निशाना
JMM ने भाजपा द्वारा संविधान पढ़ने की सलाह दिए जाने पर कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची और राज्यों की विधायी शक्तियों को भी पूरे संदर्भ में समझने की जरूरत है।
पार्टी ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों का संतुलन भारतीय संघीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। JMM के अनुसार, राज्य अपने संवैधानिक अधिकारों की बात करता है तो इसे केंद्र से टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
‘खनिज लूट’ के आरोपों पर प्रमाण मांगे
खनिज क्षेत्र में कथित अनियमितताओं और ‘खनिज लूट’ जैसे आरोपों पर JMM ने भाजपा से प्रमाण सामने रखने की मांग की। पार्टी ने कहा कि यदि किसी मामले में ठोस सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों और कानून के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
JMM ने खनन नीलामी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी भाजपा से केंद्र की भूमिका स्पष्ट करने को कहा। पार्टी के अनुसार खनिज प्रशासन, पर्यावरणीय मंजूरियों और नीलामी व्यवस्था में केंद्र की भूमिका को भी चर्चा में शामिल किया जाना चाहिए।
छात्रों के मुद्दे को खनिज अधिकारों से जोड़ने पर आपत्ति
JMM ने छात्रों के आंदोलन और JMBL Cess के मुद्दे को एक साथ जोड़ने पर भी भाजपा पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि छात्रों से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके नाम पर राज्य के खनिज अधिकारों से संबंधित मुद्दे को दबाया नहीं जा सकता।
JMM ने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले राजस्व और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए राज्य की वित्तीय क्षमता से जुड़े सवालों पर सरकार और राजनीतिक दलों को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
पार्टी ने अंत में कहा कि झारखंड की खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों और राज्य के हितों के सवाल पर वह पीछे नहीं हटेगी। JMM ने इसे जल-जंगल-जमीन और झारखंड के अधिकारों से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि राज्य के संसाधनों का न्यायपूर्ण लाभ यहां के लोगों तक पहुंचना चाहिए।
नोट: इस खबर में JMM द्वारा लगाए गए आरोप और दावे उसी पार्टी के बयान के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है।

