मुंबई, 17 अक्टूबर 2026: जियो प्लेटफॉर्म्स अब भारत में विकसित अपनी टेक्नोलॉजी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने संकेत दिया है कि करीब 12 रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से जियो की टेक्नोलॉजी 150 करोड़ अतिरिक्त यूजर्स तक पहुंच सकती है।
जियो के आईपीओ से पहले मुंबई में ब्रोकर्स के साथ बातचीत के दौरान सामने आए इस संकेत ने कंपनी की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों के अलावा पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में भी कंपनी संभावनाएं तलाश रही है।
अमेरिका और जर्मनी जैसे बाजारों में भी अवसर
जियो की नजर केवल उन देशों पर नहीं है, जहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अभी विकास के चरण में है। कंपनी अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित बाजारों में भी अवसर देख रही है। आकाश अंबानी के मुताबिक, इन देशों में फाइबर नेटवर्क के विस्तार की मौजूदा स्थिति जियो के लिए संभावनाएं पैदा कर सकती है।
इसके अलावा पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका भी कंपनी की संभावित बाजार रणनीति का हिस्सा हैं। हालांकि, इन क्षेत्रों में साझेदारियों और विस्तार से जुड़ी योजनाओं का अंतिम स्वरूप संबंधित समझौतों पर निर्भर करेगा।
स्थानीय टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझेदारी पर जोर
जियो की योजना विदेशों में सीधे टेलीकॉम ऑपरेटर बनने के बजाय स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी करने की है। इसके तहत कंपनी अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और नेटवर्क से जुड़ी क्षमताएं दूसरे देशों के ऑपरेटरों को उपलब्ध करा सकती है।
जियो अपने इंटीग्रेटेड होम ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी स्टैक को अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देख रहा है। इस मॉडल के जरिए स्थानीय कंपनियां जियो की तकनीक का इस्तेमाल कर सकती हैं, जबकि जियो को अपने प्लेटफॉर्म के वैश्विक विस्तार का अवसर मिल सकता है।
5G और होम ब्रॉडबैंड होंगे अहम क्षेत्र
जियो की अंतरराष्ट्रीय रणनीति में होम ब्रॉडबैंड के साथ 5G टेक्नोलॉजी की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। कंपनी अलग-अलग देशों की जरूरतों के मुताबिक अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के लिए संभावित साझेदार तलाश रही है।
आकाश अंबानी ने तकनीक विकसित करने और उसे बड़े स्तर पर सफलतापूर्वक संचालित करने के बीच अंतर पर जोर दिया। कंपनी का तर्क है कि भारत में बड़े पैमाने पर अपनी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर जियो ने इन दोनों क्षमताओं को विकसित किया है। अब इसी अनुभव को दूसरे बाजारों तक ले जाने की योजना है।
भारत में विकसित तकनीक को दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश
जियो की ग्लोबल विस्तार योजना भारत के टेक्नोलॉजी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब तक भारत को बड़ी वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए एक विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में देखा जाता रहा है। जियो की रणनीति भारत में विकसित और बड़े स्तर पर इस्तेमाल की गई तकनीक को दूसरे देशों में उपलब्ध कराने की है।
यदि प्रस्तावित साझेदारियां आगे बढ़ती हैं, तो कंपनी को विदेशी बाजारों से राजस्व के नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, यह भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमताएं प्रदर्शित करने का अवसर भी होगा।
हालांकि, करीब 150 करोड़ अतिरिक्त यूजर्स तक पहुंचने का आंकड़ा संभावित साझेदारियों पर आधारित अनुमान है। वास्तविक पहुंच इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने समझौते होते हैं और उन्हें किस स्तर पर लागू किया जाता है।

