नई दिल्ली। भारत के मोबाइल और इंटरनेट बाजार में पिछले दस वर्षों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी मोबाइल खर्च बचाने के लिए लोग मिस्ड कॉल का सहारा लेते थे और इंटरनेट इस्तेमाल करते समय हर एमबी डेटा का हिसाब रखते थे। आज वही मोबाइल वीडियो कॉल, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन पढ़ाई, ओटीटी, वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन खरीदारी का अहम माध्यम बन चुका है।
5 सितंबर को रिलायंस जियो के लॉन्च के दस साल पूरे हो रहे हैं। इस दौरान भारत में इंटरनेट की रफ्तार बढ़ी, डेटा की कीमतों में भारी कमी आई और प्रति ग्राहक डेटा खपत कई गुना बढ़ गई।
10 साल में 27 गुना तेज हुआ मोबाइल इंटरनेट
बीते एक दशक में मोबाइल इंटरनेट की गति में बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2016 में भारत में औसत मोबाइल डाउनलोड स्पीड करीब 2.5 Mbps थी। दिसंबर 2025 तक यह बढ़कर 68 Mbps से अधिक पहुंच गई।
इस तरह लगभग दस वर्षों में मोबाइल इंटरनेट की गति 27 गुना से ज्यादा बढ़ी। तेज इंटरनेट ने वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
₹228 से घटकर ₹8 के नीचे पहुंची 1GB डेटा की कीमत
डेटा की कीमतों में भी इस अवधि के दौरान उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। वर्ष 2016 में एक जीबी मोबाइल डेटा की औसत कीमत करीब 228 रुपये थी। बाद के वर्षों में यह घटकर लगभग 7.9 रुपये प्रति जीबी पहुंच गई।
इसका अर्थ है कि दस वर्षों में मोबाइल डेटा करीब 29 गुना सस्ता हो गया। सस्ते डेटा का सीधा असर इंटरनेट के इस्तेमाल पर पड़ा और देश में डिजिटल सेवाओं की पहुंच तेजी से बढ़ी।
एनालिसिस मेसन की रिपोर्ट के अनुसार, प्रति वायरलेस डेटा ग्राहक मासिक डेटा उपयोग 0.2GB से कम से बढ़कर 25.7GB तक पहुंच गया। यह डेटा खपत में 128 गुना से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है।
देश में औसत मासिक डेटा खपत 26.7GB पहुंची
TRAI के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 तिमाही में भारत का एक वायरलेस डेटा ग्राहक औसतन 26.7GB डेटा प्रति माह इस्तेमाल कर रहा था। प्रति जीबी वायरलेस डेटा से औसत राजस्व भी घटकर 7.51 रुपये तक पहुंच गया।
मार्च 2026 के अंत तक देश में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या करीब 109.3 करोड़ थी। वहीं ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या लगभग 106.6 करोड़ दर्ज की गई।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इंटरनेट अब केवल संचार का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि दैनिक जीवन और डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
जियो नेटवर्क पर प्रति ग्राहक 43.7GB डेटा इस्तेमाल
डेटा खपत का स्तर जियो नेटवर्क पर राष्ट्रीय औसत से भी अधिक रहा। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में जियो के एक ग्राहक ने औसतन 43.7GB डेटा प्रति माह इस्तेमाल किया।
इस अवधि में जियो नेटवर्क पर कुल 69.4 बिलियन GB डेटा ट्रैफिक दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 26.9 प्रतिशत अधिक था। जून 2026 के अंत तक कंपनी का ग्राहक आधार 53.33 करोड़ पहुंच गया था।
5G के बढ़ते विस्तार के साथ डेटा खपत में और वृद्धि देखी जा रही है। जून 2026 तक जियो के 5G ग्राहकों की संख्या करीब 28.5 करोड़ पहुंच चुकी थी। कंपनी के नेटवर्क पर 5G डेटा ट्रैफिक 4G की तुलना में करीब डेढ़ गुना बताया गया है।
दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल डेटा बाजारों में शामिल हुआ भारत
मोबाइल इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल ने वैश्विक स्तर पर भी भारत की स्थिति मजबूत की है। एनालिसिस मेसन के आकलन के अनुसार मार्च 2026 तक भारत मोबाइल डेटा ट्रैफिक खपत के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया था।
बीते दस वर्षों में भारत ने सीमित और महंगे मोबाइल डेटा के दौर से निकलकर सस्ते और व्यापक इंटरनेट उपयोग तक का सफर तय किया है। कभी मिस्ड कॉल के जरिए संदेश पहुंचाने और एमबी बचाकर इंटरनेट इस्तेमाल करने वाला भारत आज हर महीने औसतन 26GB से अधिक मोबाइल डेटा का उपयोग कर रहा है।
जियो के दस साल पूरे होने के साथ भारत के डिजिटल बदलाव की यह यात्रा इंटरनेट की बढ़ती पहुंच, कम होती कीमतों और बदलती तकनीकी जरूरतों की तस्वीर भी पेश करती है।


