रांची/गिरिडीह। झारखंड की राजनीति में एक दुखद संयोग सामने आया है। वर्ष 2020 से अब तक हेमंत सोरेन सरकार के चार मंत्रियों का मंत्री पद पर रहते हुए निधन हो चुका है। इनमें हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू का नाम शामिल है।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के साथ ही झारखंड मुक्ति मोर्चा को राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर बड़ा झटका लगा है। वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे और सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का हो चुका है निधन
झारखंड में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों का तीन वर्षों के भीतर निधन होना भी एक दुखद संयोग माना जा रहा है।
टाइगर जगरनाथ महतो का निधन 6 अप्रैल 2023 को हुआ था। वह लंबे समय से बीमार थे और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। इसके बाद शिक्षा विभाग से जुड़े मंत्री रामदास सोरेन का निधन 15 अगस्त 2025 को हुआ।
अब 6 सितंबर 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की खबर सामने आई है। उनके निधन की वजह को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
2020 में हाजी हुसैन अंसारी का हुआ था निधन
हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री पद पर रहते हुए निधन होने वाले नेताओं में सबसे पहला नाम हाजी हुसैन अंसारी का है। उनका निधन 3 अक्टूबर 2020 को हुआ था।
इसके बाद वर्ष 2023 में जगरनाथ महतो, 2025 में रामदास सोरेन और 2026 में सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से झारखंड की राजनीति को लगातार बड़े झटके लगे हैं।
इन नेताओं के निधन ने सरकार और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संगठन को अलग-अलग समय पर प्रभावित किया।
जगरनाथ महतो के बाद हेमंत सोरेन के भरोसेमंद बने सोनू
सुदिव्य कुमार सोनू को झामुमो के भरोसेमंद नेताओं में शामिल माना जाता था। जगरनाथ महतो के निधन के बाद पार्टी और सरकार में उनकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती गई।
राजनीतिक और संगठनात्मक मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। वह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विश्वासपात्र नेताओं में गिने जाते थे।
छात्रों से जुड़े मुद्दों और आंदोलनों के दौरान भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। वह हाई पावर कमेटी के सदस्य के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे थे।
करीब तीन दशक तक झामुमो से जुड़े रहे
झारखंड की राजनीति में सुदिव्य कुमार सोनू की पहचान केवल गिरिडीह के विधायक या मंत्री तक सीमित नहीं थी। वह लगभग तीन दशक तक झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े रहे और पार्टी के संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
उन्होंने चुनावी राजनीति में कई उतार-चढ़ाव देखे। वर्ष 2009 और 2014 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बावजूद उन्होंने राजनीति और संगठन से दूरी नहीं बनाई।
संगठन में सक्रिय रहने के कारण पार्टी के भीतर उनकी भूमिका लगातार मजबूत होती गई।
2019 में पहली बार बने विधायक, 2024 में दोबारा जीते
सुदिव्य कुमार सोनू ने वर्ष 2019 में गिरिडीह विधानसभा सीट से पहली बार जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की।
दूसरी बार विधायक बनने के बाद उन्हें हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अलावा नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी थी।
झामुमो के लिए उनका निधन ऐसे समय में बड़ा झटका माना जा रहा है, जब पार्टी को सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर कई महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना है।

