रांची। झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य में डीजीपी नियुक्ति के लिए बनाए गए नियमों और अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
मामले में अदालत के सामने राज्य सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया की वैधता और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के अनुरूप डीजीपी की नियुक्ति किए जाने का मुद्दा है। तदाशा मिश्रा को उनकी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले डीजीपी नियुक्त किए जाने को लेकर भी पहले अदालत में सवाल उठ चुके हैं।
केंद्र ने नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से तुषार मेहता ने झारखंड सरकार की डीजीपी नियुक्ति नियमावली और उसके आधार पर की गई नियुक्ति पर आपत्ति जताई। केंद्र की दलीलों के अनुसार, राज्य में डीजीपी चयन की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था।
मामले में नियुक्ति के लिए अधिकारियों के पैनल और चयन प्रक्रिया से जुड़े नियमों की वैधता भी प्रमुख मुद्दा है। इससे पहले सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि तदाशा मिश्रा को डीजीपी पद का अवसर देने के लिए नियुक्ति नियमावली के नियम-5 में संशोधन किया गया था।

तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर क्या है विवाद?
तदाशा मिश्रा 1994 बैच की झारखंड कैडर की IPS अधिकारी हैं। उन्हें राज्य का पूर्णकालिक डीजीपी उस समय नियुक्त किया गया था, जब उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति में केवल एक दिन बचा था।
याचिका में इसी नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। मामले में यह सवाल भी उठाया गया है कि राज्य सरकार की ओर से बनाई गई नियुक्ति नियमावली सुप्रीम कोर्ट के डीजीपी चयन से जुड़े दिशा-निर्देशों के अनुरूप है या नहीं।
राज्य सरकार ने नियम में संशोधन का दिया था तर्क
इस मामले में झारखंड सरकार की ओर से कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया था कि तदाशा मिश्रा डीजीपी रैंक में पदोन्नत होने वाली महिला अधिकारी हैं और उन्हें अवसर देने के लिए नियम-5 में संशोधन किया गया।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए डीजीपी नियुक्ति की नियमावली बनाई है। वहीं, मामले में न्याय मित्र की रिपोर्ट में नियम में किए गए संशोधन और नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताए जाने की जानकारी सामने आई है।
अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को
मंगलवार की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से मामले की जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया। हालांकि, झारखंड सरकार की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने तत्काल उपलब्धता को लेकर असमर्थता जताई।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2026 को तय की। अगली सुनवाई में झारखंड सरकार द्वारा बनाई गई डीजीपी नियुक्ति नियमावली की वैधता और तदाशा मिश्रा की नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर आगे सुनवाई होगी।
मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है और नियुक्ति की वैधता पर अंतिम फैसला अदालत की आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
