जयशंकर बोले- BRICS और UN को प्रतिद्वंद्वी न समझें, UNSC सुधार पर दिया जोर

जयशंकर बोले- BRICS और UN को प्रतिद्वंद्वी न समझें, UNSC सुधार पर दिया जोर

वॉशिंगटन। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि BRICS और संयुक्त राष्ट्र (UN) को एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों के सामने BRICS और संयुक्त राष्ट्र में से किसी एक को चुनने का विकल्प रखना सही दृष्टिकोण नहीं है।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित एक चर्चा में जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, BRICS और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर भारत का पक्ष रखा।

BRICS और UN को लेकर क्या बोले जयशंकर?

‘Ruptures and Ramparts: Building Bridges for a Changing World’ नाम के सत्र को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि BRICS संयुक्त राष्ट्र के खिलाफ नहीं है। उनके अनुसार, BRICS के कई सदस्य संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था में सुधार के पक्ष में हैं।

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में कुछ कमियां हो सकती हैं, लेकिन वैश्विक संस्था के तौर पर उसकी कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां भी रही हैं। इसलिए उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसमें जरूरी सुधार किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में बदलाव की मांग का मतलब इस संस्था का विरोध करना नहीं है। उनके मुताबिक, जो लोग संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को महत्वपूर्ण मानते हैं, वे ही इसमें सुधार की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

UNSC Reform को लेकर भारत का रुख

जयशंकर ने भारत में हुई BRICS बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि BRICS के प्रमुख मुद्दों में संयुक्त राष्ट्र को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के केंद्र में बनाए रखना भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि BRICS और UN के बीच किसी तरह का चुनाव करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, BRICS संयुक्त राष्ट्र का समर्थन करता है और समूह के कई देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग करते हैं।

जयशंकर ने BRICS के प्रमुख मुद्दों में लचीलापन, स्थिरता, नवाचार और सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये मुद्दे संयुक्त राष्ट्र के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग क्यों?

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा संरचना में बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि वैश्विक परिस्थितियां बदल चुकी हैं और संस्थाओं को भी बदलती दुनिया के अनुरूप होना चाहिए।

उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र में सुधार का उद्देश्य इसकी भूमिका को कमजोर करना नहीं बल्कि इसे मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि BRICS ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार के उद्देश्य को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।

UNSC में पांच स्थायी सदस्य

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्तमान में पांच स्थायी सदस्य हैं। इनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। इन देशों के पास वीटो पावर है।

इसके अलावा सुरक्षा परिषद में 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिनका कार्यकाल दो वर्ष का होता है। इन सदस्यों का चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा किया जाता है।

भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता रहा है। भारत का तर्क है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद की संरचना में व्यापक प्रतिनिधित्व की जरूरत है।

जयशंकर के ताजा बयान में भी BRICS और संयुक्त राष्ट्र को विरोधी समूहों के रूप में देखने के बजाय वैश्विक संस्थाओं में सुधार और सहयोग पर जोर दिया गया।

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