IIT ISM के पूर्व छात्र का कमाल, 14 हजार फीट पर 78 मिनट उड़ा स्वदेशी ड्रोन

IIT ISM के पूर्व छात्र का कमाल, 14 हजार फीट पर 78 मिनट उड़ा स्वदेशी ड्रोन

धनबाद, 15 सितंबर। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के पूर्व छात्र सौरव सिंह और उनके को-फाउंडर की कंपनी ने एक स्वदेशी ड्रोन विकसित किया है, जिसने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के हाई-एल्टीट्यूड ट्रायल के दौरान 14 हजार फीट की ऊंचाई पर 1 घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड तक उड़ान भरी।

भारतीय सेना की ओर से इस ऊंचाई पर लगातार 45 मिनट उड़ान का लक्ष्य दिया गया था। कंपनी के अनुसार, Vijay Z-1 ड्रोन ने निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक समय तक उड़ान भरकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

IIT ISM के 2020 बैच के छात्र हैं सौरव सिंह

सौरव सिंह आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के 2020 बैच के छात्र रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में माइनिंग इंजीनियरिंग में एमटेक पूरा किया। वर्तमान में वह जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के को-फाउंडर हैं।

वर्ष 2025 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप सेंटर ऑफ इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE), IIT (ISM) धनबाद में इनक्यूबेटेड है।

स्टार्टअप ने अपने ड्रोन को Vijay Z-1 नाम दिया है। यह एक UAV यानी अनमैंड एरियल व्हीकल है। कंपनी के अनुसार इसे कठिन मौसम और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निगरानी समेत विभिन्न कार्यों के लिए विकसित किया गया है।

14 हजार फीट पर 78 मिनट की उड़ान

Vijay Z-1 पर काम अगस्त 2025 में शुरू हुआ था। कंपनी के अनुसार, इसी महीने तैयार किए गए पहले प्रोटोटाइप ने 100 मिनट से अधिक की उड़ान भरी थी।

अब तक टीम पांच प्रोटोटाइप तैयार कर चुकी है। जून 2026 में तैयार छठा और नवीनतम वर्जन फाइनल वर्जन बताया गया है। इसमें 85 फीसदी से अधिक स्वदेशी कंटेंट होने का दावा किया गया है। ड्रोन का कार्बन-फाइबर फ्रेम भी टीम ने खुद डिजाइन और विकसित किया है।

कंपनी के अनुसार, ड्रोन पर 1000 घंटे से अधिक ग्राउंड टेस्टिंग और क्रैश टेस्टिंग की जा चुकी है।

Vijay Z-1 ने सामान्य ऊंचाई पर 2 घंटे 22 मिनट, 12 हजार फीट पर 1 घंटे 20 मिनट 33 सेकेंड और 14 हजार फीट पर 1 घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड की उड़ान का प्रदर्शन किया है।

40 KM रेंज और 500 ग्राम तक पेलोड क्षमता

Vijay Z-1 की ऑपरेशनल ऊंचाई 4200 मीटर बताई गई है। इसकी रेंज 40 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 500 ग्राम तक है, जिसे 1.2 किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है।

ड्रोन का वजन करीब 2.7 किलोग्राम है और यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम पर काम करता है। कंपनी के अनुसार इसे हाई-एंड्योरेंस और ऑल-वेदर क्वाडकॉप्टर के तौर पर विकसित किया गया है।

अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना ने किया ट्रायल

भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड ने 3 और 4 अगस्त 2026 को अरुणाचल प्रदेश में एक हाई-एल्टीट्यूड बेस कैंप और सेला टॉप के ऊपर Vijay Z-1 का परीक्षण किया।

ट्रायल के दौरान बारिश और कोहरे जैसी परिस्थितियों के बावजूद ड्रोन ने प्रदर्शन किया। कंपनी के अनुसार, परीक्षण के बाद भारतीय सेना की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और ड्रोन को शामिल किए जाने में रुचि दिखाई गई है।

सितंबर 2026 में Vijay Z-1 का प्रोक्योरमेंट-लेवल वैलिडेशन टेस्टिंग चल रहा है।

हर महीने 90 ड्रोन बनाने की क्षमता

जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स फिलहाल बूटस्ट्रैप्ड स्टार्टअप है। कंपनी के अनुसार उसकी हर महीने 90 ड्रोन बनाने की क्षमता है।

कंपनी ड्रोन की दूसरी सीरीज और हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम पर भी काम कर रही है। इसके अलावा 50 मिनट से अधिक फ्लाइट टाइम वाला एक कॉम्पैक्ट ट्रेनिंग ड्रोन भी कमर्शियलाइजेशन के लिए तैयार बताया गया है।

सौरव सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत से जुड़ी तकनीकों में देश को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है, खासकर ऐसी तकनीकें जो संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ी हों। वहीं, IIT (ISM) के डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस प्रो. आलोक दास ने Vijay Z-1 को पूर्व छात्रों के विचारों के उपयोगी तकनीक में बदलने का उदाहरण बताया।

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