शिमला: IBPS भर्ती परीक्षा में अपनी जगह कथित तौर पर दूसरे उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठाकर हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में नौकरी हासिल करने के मामले में CBI ने दो बैंक कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। दोनों आरोपियों की पहचान राजस्थान के करौली निवासी रविंद्र मीणा और सवाई माधोपुर निवासी जितेंद्र कुमार मीणा के रूप में हुई है।
FIR में कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। CBI अब पूरे मामले की जांच कर रही है।
2023 की परीक्षा में प्रॉक्सी बैठाने का आरोप
CBI की FIR के मुताबिक, रविंद्र मीणा ने 2023 की IBPS भर्ती परीक्षा में अपनी जगह कथित तौर पर किसी दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाया था।
चयन के बाद उसे हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में ऑफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पस) पद पर प्रोविजनल नियुक्ति मिली। उसने 12 फरवरी 2024 को बैंक में नौकरी जॉइन की और बाद में मंडी जिले की बगस्याड़ शाखा में तैनात रहा।
बायोमीट्रिक जांच से खुला मामला
मामला उस समय सामने आया, जब IBPS ने भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों का दोबारा बायोमीट्रिक सत्यापन कराया।
CBI के अनुसार, रविंद्र मीणा का बायोमीट्रिक रिकॉर्ड प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के दौरान दर्ज रिकॉर्ड से मेल नहीं खाया।
इसके अलावा भर्ती रिकॉर्ड में लगी फोटो और दस्तावेज भी उसके वर्तमान फोटो और दस्तावेजों से कथित तौर पर अलग पाए गए।
2022 की परीक्षा में भी ऐसा ही आरोप
दूसरे आरोपी जितेंद्र कुमार मीणा पर भी इसी तरह प्रॉक्सी उम्मीदवार बैठाने का आरोप है।
FIR के अनुसार, उसने 2022 की IBPS भर्ती परीक्षा में अपनी जगह कथित तौर पर एक दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाया था। चयन के बाद उसने 1 जुलाई 2023 को हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में ऑफिस असिस्टेंट के पद पर नौकरी शुरू की।
बाद में उसकी तैनाती मंडी जिले की पांगणा शाखा में की गई।
फर्जी चयन के आधार पर वेतन और लोन लेने का आरोप
CBI का आरोप है कि दोनों ने कथित फर्जी चयन के आधार पर बैंक में नौकरी की और इस दौरान वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधाएं हासिल कीं। दोनों आरोपी 3 फरवरी 2026 तक बैंक की सेवा में रहे।
CBI के मुताबिक, रविंद्र मीणा को करीब 11.10 लाख रुपये वेतन और अन्य भत्ते मिले। उसने बैंक से करीब 3 लाख रुपये का लोन भी लिया था, जिसमें करीब 2.28 लाख रुपये बकाया बताए गए हैं।
वहीं, जितेंद्र कुमार मीणा को करीब 14.46 लाख रुपये वेतन और भत्ते मिलने की बात सामने आई है। उसके नाम पर 5 लाख और 3 लाख रुपये के दो लोन दर्ज हैं, जिनमें करीब 7.45 लाख रुपये बकाया बताया गया है।
जांच के दायरे में परीक्षा से जुड़े संस्थान
CBI की FIR में मामले से जुड़े परीक्षा केंद्रों के तौर पर शिवा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, चांदपुर (बिलासपुर) और एलआर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, ओच्छघाट (सोलन) का भी उल्लेख है।
अब जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित प्रॉक्सी उम्मीदवारों की व्यवस्था कैसे की गई और भर्ती प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।
CBI बायोमीट्रिक रिकॉर्ड, भर्ती से जुड़े दस्तावेज और दूसरे सबूतों की जांच कर रही है। जांच के दौरान अगर किसी अन्य व्यक्ति या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

