निरसा: निर्माणाधीन गोविंदपुर एलिवेटेड ब्रिज का मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है। निरसा विधायक अरुप चटर्जी ने धनबाद सांसद ढुल्लू महतो पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुल निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। विधायक का आरोप है कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री मानकों के अनुरूप नहीं दिख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें अब तक निर्माण कार्य का एस्टीमेट उपलब्ध नहीं कराया गया है। हालांकि, विधायक की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सांसद ढुल्लू महतो पर लगाए निर्माण कार्य से जुड़े आरोप

विधायक अरुप चटर्जी ने आरोप लगाया कि एलिवेटेड ब्रिज निर्माण के पीछे सांसद ढुल्लू महतो की भूमिका है और केंद्र के मंत्री के इशारे पर काम कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के नाते निर्माण कार्य का एस्टीमेट उपलब्ध कराने और गुणवत्ता वाली सामग्री के इस्तेमाल की मांग की थी।
विधायक के मुताबिक, अब तक उन्हें निर्माण कार्य का एस्टीमेट नहीं दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुल का निर्माण सार्वजनिक हित से जुड़ा है, तो इसकी लागत और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से संबंधित जानकारी पारदर्शी होनी चाहिए।
गोविंदपुर ब्रिज की गुणवत्ता पर जताई चिंता
अरुप चटर्जी ने गोविंदपुर में बन रहे एलिवेटेड ब्रिज की निर्माण गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरिया और अन्य निर्माण सामग्री को देखकर उन्हें गुणवत्ता को लेकर संदेह हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि निर्माण में मानकों का पालन नहीं किया गया, तो पुल लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रहेगा।
विधायक ने निरसा के बरबेंदिया ब्रिज का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह पहले पुल गिरने की घटना हुई थी, वैसी स्थिति गोविंदपुर एलिवेटेड ब्रिज के साथ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की जरूरत बताई। गौरतलब है कि ये सभी बातें विधायक ने अपने बयान में कही हैं। निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन तकनीकी जांच के बाद ही हो सकता है।
स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के नाते निगरानी की जिम्मेदारी
विधायक अरुप चटर्जी ने कहा कि एलिवेटेड ब्रिज केंद्र सरकार की योजना है, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के नाते निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाना और जनता के हितों की रक्षा करना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर पहले भी आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
उनके अनुसार, पुल का निर्माण सही तरीके से पूरा होने पर निरसा और आसपास के लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। साथ ही क्षेत्र के विकास को भी गति मिल सकती है।
एलिवेटेड ब्रिज से दुर्घटनाओं में कमी की उम्मीद
अरुप चटर्जी ने कहा कि निरसा घनी आबादी वाला इलाका है, जहां अक्सर सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं। उनके मुताबिक, एलिवेटेड ब्रिज बनने से यातायात व्यवस्था बेहतर हो सकती है और दुर्घटनाओं की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।
दिल्ली-कोलकाता मार्ग पर आने-जाने वाले बड़े वाहनों को भी इससे सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विधायक ने कहा कि यदि पुल का निर्माण समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से नहीं हुआ, तो यह क्षेत्र के विकास के लिए नुकसानदायक होगा।
फिलहाल, गोविंदपुर एलिवेटेड ब्रिज की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर विधायक के आरोपों के बाद मामला फिर चर्चा में है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित निर्माण एजेंसी और सांसद की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर कोई तकनीकी जांच कराई जाती है या नहीं।

